अबूझ मुहूर्त 2026 और 2027: क्या हैं, और क्या फिर भी मुहूर्त निकलवाएँ?

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अबूझ मुहूर्त वह दिन है जो अपने आप में शुभ है, इसलिए उस दिन शुभ कार्य शुरू करने के लिए अलग से मुहूर्त की ज़रूरत नहीं होती। दिन की शुभता उसकी तिथि से आती है। उस दिन का लग्न, आपकी कुंडली और राहु काल तिथि से तय नहीं होते, इसलिए Tarini सलाह देता है कि अबूझ दिन के भीतर भी मुहूर्त निकलवाएँ। अंतिम अपडेट: 21 अक्टूबर 2026

अबूझ मुहूर्त हैं साढ़े तीन मुहूर्त, यानी गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया, विजयादशमी और आधा बलि प्रतिपदा, और उत्तर भारत में वसंत पंचमी, फुलेरा दूज, भड़ली नवमी और देवउठनी एकादशी।

अबूझ मुहूर्त क्या है?

अबूझ का अर्थ है "जिसे बूझना न पड़े"। अबूझ मुहूर्त, जिसे स्वयंसिद्ध मुहूर्त भी कहते हैं, ऐसा दिन है जो अपने आप में इतना शुभ है कि उस दिन विवाह, गृह प्रवेश, खरीद या नया काम बिना पंचांग देखे शुरू किया जा सकता है। सबसे प्रसिद्ध हैं साढ़े तीन मुहूर्त, साल के वे साढ़े तीन दिन जो हर शुभ कार्य के लिए शुभ माने जाते हैं।

कौन-से दिन अबूझ मुहूर्त हैं?

  • साढ़े तीन मुहूर्त (महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक और गोवा): गुड़ी पड़वा, अक्षय तृतीया, विजयादशमी, और आधे मुहूर्त के रूप में बलि प्रतिपदा।
  • उत्तर भारत के अबूझ दिन, मुख्य रूप से विवाह के लिए: अक्षय तृतीया (आखा तीज), वसंत पंचमी, फुलेरा दूज, भड़ली नवमी और देवउठनी एकादशी।
  • कुछ क्षेत्रीय सूचियों में जुड़ने वाले दिन: राम नवमी, जानकी नवमी, गंगा दशहरा, वैशाख पूर्णिमा, जलझूलनी एकादशी, धनतेरस और अक्षय नवमी।

ये दिन अबूझ क्यों हैं?

हर अबूझ दिन की शुभता उसकी तिथि से आती है: जिस दिन युग आरंभ हुआ, वर्ष का आरंभ, या किसी देवता का अपना दिन।

अक्षय तृतीया अबूझ मुहूर्त क्यों है?

अक्षय तृतीया पर सूर्य और चंद्रमा दोनों उच्च के होते हैं। सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में और चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में होता है। दोनों ग्रह एक ही दिन अपने सबसे बलवान रूप में होते हैं। अक्षय तृतीया युगादि तिथि भी है, जिस दिन त्रेता युग आरंभ हुआ। अक्षय का अर्थ है "जिसका क्षय न हो", इसलिए इस दिन शुरू किया गया कार्य घटता नहीं।

… युगाद्याः सिते गोऽग्नी बाहुलराधयोर्मदनदर्शौ भद्रमाघासिते "… युगादि तिथियाँ: शुक्ल पक्ष में कार्तिक की नवमी और वैशाख की तृतीया; कृष्ण पक्ष में भाद्रपद की त्रयोदशी और माघ की अमावस्या।" (Muhurta Chintamani 1.58)

गुड़ी पड़वा अबूझ मुहूर्त क्यों है?

गुड़ी पड़वा, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, नए संवत्सर की पहली तिथि है। नया वर्ष, चैत्र मास और वासंतिक नवरात्र इसी दिन आरंभ होते हैं, और इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना आरंभ की। प्रतिपदा, एक नंदा तिथि, आरंभ की तिथि है। नया वर्ष खुलते समय सूर्य मीन में, राशिचक्र की अंतिम राशि में होता है।

विजयादशमी अबूझ मुहूर्त क्यों है?

विजयादशमी, आश्विन शुक्ल दशमी, विजय का दिन है। इसी दिन श्री राम ने रावण पर विजय पाई, और महिषासुर पर देवी की विजय के साथ नवरात्र पूर्ण होते हैं। दशमी पूर्णा तिथि है। विजयादशमी उस दिन मनाई जाती है जिस दिन दशमी अपराह्न में हो, और उस अपराह्न का श्रवण नक्षत्र विशेष शुभ है। परिवार अपराजिता और शमी पूजन के बाद अपराह्न के विजय मुहूर्त में नए कार्य आरंभ करते हैं।

बलि प्रतिपदा आधा अबूझ मुहूर्त क्यों है?

बलि प्रतिपदा, कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा, साढ़े तीन मुहूर्तों में आधे मुहूर्त के रूप में गिनी जाती है। यह दीपावली के अगले दिन है: राजा बलि के लौटने का दिन, गोवर्धन पूजा का दिन, और गुजरात का नया वर्ष। बलि प्रतिपदा पर सूर्य हर वर्ष तुला में नीच का होता है, क्योंकि कार्तिक मास सूर्य के तुला में रहते आरंभ होता है।

वसंत पंचमी अबूझ मुहूर्त क्यों है?

वसंत पंचमी, माघ शुक्ल पंचमी, देवी सरस्वती का दिन और वसंत के आगमन का दिन है। पंचमी पूर्णा तिथि है, और सूर्य उत्तरायण में मकर राशि में होता है, वर्ष का वह भाग जिसे शास्त्र शुभ आरंभ के लिए श्रेष्ठ बताते हैं।

फुलेरा दूज अबूझ मुहूर्त क्यों है?

फुलेरा दूज, फाल्गुन शुक्ल द्वितीया, वह दिन है जब श्री कृष्ण ने राधा जी के साथ फूलों से होली खेली, और ब्रज में होली का उत्सव आरंभ होता है। द्वितीया भद्रा तिथि है, और सूर्य कुंभ में होता है। यह होलाष्टक से पहले का अंतिम अबूझ दिन है।

देवउठनी एकादशी अबूझ मुहूर्त क्यों है?

देवउठनी एकादशी, कार्तिक शुक्ल एकादशी, को भगवान विष्णु चार मास की योगनिद्रा से जागते हैं। चातुर्मास समाप्त होता है, विवाह फिर से आरंभ होते हैं, और तुलसी विवाह होता है। एकादशी नंदा तिथि है, और सूर्य तुला में होता है या वृश्चिक में अभी-अभी प्रवेश करता है।

भड़ली नवमी अबूझ मुहूर्त क्यों है?

भड़ली नवमी, आषाढ़ शुक्ल नवमी, देवशयनी एकादशी से पहले का अंतिम अबूझ दिन है, जब भगवान विष्णु शयन करते हैं और चातुर्मास आरंभ होता है। नवमी रिक्ता तिथि है, जो किसी और दिन छोड़ी जाती है, फिर भी भड़ली नवमी अबूझ मानी जाती है।

क्या अबूझ दिन पर भी मुहूर्त निकलवाएँ?

बिल्कुल हाँ! अबूझ दिन शुभ है, और उसमें दिन के दोषों से आने वाली बाधाओं को दूर करने की शक्ति है। पर अगर कार्य अनुचित लग्न में आरंभ किया जाए, या कमज़ोर चंद्र बल या तारा बल के कारण मन की सही स्थिति न हो, तो बाधाएँ फिर भी आती हैं। इसलिए अबूझ दिन के भीतर भी मुहूर्त निकलवाएँ, या कोई दूसरा दिन चुनें जो आपके कार्य के लिए अधिक अनुकूल हो।

अबूझ दिन पर भी क्या देखा जाता है?

  • लग्न लगभग हर दो घंटे बदलता है। शुभ आरंभ के लिए केवल बलवान, शुद्ध लग्न उपयुक्त है, जो पाँचों बाणों (रोग, अग्नि, राज, चोर और मृत्यु) से रहित हो।
  • दिन आपकी कुंडली के अनुकूल होना चाहिए। तारा बल और चंद्र बल व्यक्तिगत हैं, इसलिए अबूझ दिन भी आपके लिए कमज़ोर हो सकता है।
  • अबूझ दिन पर भी राहु काल आता है। उसमें शुभ कार्य आरंभ नहीं किया जाता।
  • तिथि जल्दी समाप्त हो सकती है। नई दिल्ली में अक्षय तृतीया 2027 की तृतीया सुबह 09:04 पर समाप्त होती है।
  • अवसर के अपने नियम लागू रहते हैं। वाहन मंगलवार को नहीं लिया जाता, और विजयादशमी 2026 मंगलवार को पड़ी। देखें गाड़ी की डिलीवरी का मुहूर्त।
  • समय आपके शहर के होते हैं। लग्न और राहु काल आपके शहर के सूर्योदय से तय होते हैं।

क्या अक्षय तृतीया पर बिना मुहूर्त के विवाह कर सकते हैं?

नहीं। अक्षय तृतीया पर भी विवाह का मुहूर्त निकलवाएँ। विवाह का मुहूर्त दोनों की कुंडलियों और फेरों के समय के लग्न से जाँचा जाता है। कुछ वर्षों में अक्षय तृतीया पर भी विवाह का मुहूर्त नहीं होता, क्योंकि गुरु या शुक्र अस्त होते हैं। 2024 में अक्षय तृतीया पर गुरु और शुक्र दोनों अस्त थे। दोनों कुंडलियों के लिए अपना विवाह मुहूर्त लें।

अबूझ मुहूर्त 2026 और 2027: अगली तिथियाँ

नई दिल्ली के लिए अगले अबूझ मुहूर्त:

अबूझ मुहूर्ततिथितारीख
बलि प्रतिपदाकार्तिक शुक्ल प्रतिपदा10 नवंबर 2026
देवउठनी एकादशीकार्तिक शुक्ल एकादशी20 नवंबर 2026
वसंत पंचमीमाघ शुक्ल पंचमी11 फ़रवरी 2027
फुलेरा दूजफाल्गुन शुक्ल द्वितीया10 मार्च 2027
गुड़ी पड़वाचैत्र शुक्ल प्रतिपदा7 अप्रैल 2027
अक्षय तृतीयावैशाख शुक्ल तृतीया9 मई 2027
भड़ली नवमीआषाढ़ शुक्ल नवमी12 जुलाई 2027
विजयादशमीआश्विन शुक्ल दशमी9 अक्टूबर 2027

विवाह मुहूर्त 2027 और गृह प्रवेश मुहूर्त 2027 जैसी मुफ़्त वार्षिक सूचियाँ शुरुआत हो सकती हैं। पर जो मुहूर्त सामान्य रूप से शुभ है, वह आपके लिए शुभ न भी हो।