शनिदेव के लिए परंपरा में उड़द, तिल, तेल और कुलथी का दान बताया गया है, और इसका दिन शनिवार है।
आप तय करते हैं कि कितना दान करना है, किलो या ग्राम में। उस वज़न के हिसाब से मंदिर के आज के भाव पर राशि बन जाती है, इसलिए आपको पता रहता है कि आपका पैसा किस चीज़ पर, कितना लगा।
दान आपके नाम, गोत्र और स्थान के संकल्प के साथ होता है। मंदिर के पंडित जी सही मुहूर्त में संकल्प लेकर दान करते हैं।
पैसा दान की तारीख से 5 दिन पहले कटता है, ताकि मंदिर समय रहते सामग्री खरीद सके।
दान होने के बाद मंदिर से तस्वीर और संकल्प का विवरण भेजा जाता है।
Urad, Til, Tel aur Kulthi