गुरु दीक्षा मुहूर्त
दीक्षा जीवन में एक बार ली जाती है। गुरु के साथ ये राह सही घड़ी में शुरू करें।
दीक्षा लेना गंभीर कदम है, जो जीवन में एक बार उठता है। आप गुरु के साथ आध्यात्मिक राह की मज़बूत शुरुआत चाहते हैं। आप चाहते हैं कि शुरुआत उस संकल्प के वज़न के लायक हो।
मुहूर्त शास्त्र के शास्त्रीय ग्रंथ इस संस्कार को सिर्फ़ दिन से नहीं, शिष्य की अपनी कुंडली से भी देखते हैं। हम भी यही करते हैं, उस जगह के लिए जहाँ दीक्षा दी और ली जाएगी।
आपको क्या मिलेगा
जहाँ दीक्षा होगी, उस जगह के लिए दीक्षा के शुभ मुहूर्त, हर एक पर तारीख़ और शुरू-ख़त्म होने के समय के साथ। सबसे शुभ 3 मुहूर्त अलग से दिखाए गए। टालने वाले समय, उनकी वजह के साथ। और हर सुझाव के पीछे शास्त्रीय ग्रंथ का संदर्भ।
हमें क्या चाहिए
शिष्य की जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान, और वो जगह जहाँ दीक्षा दी और ली जाएगी।
दीक्षा गुरु से मिलने वाली विधिवत दीक्षा है: मंत्र मिलता है और शिष्य परंपरा से जुड़ता है। ये पूरे घर को नहीं, शिष्य को बाँधती है। इसीलिए शास्त्रीय नियम दिन के साथ शिष्य की कुंडली भी देखते हैं।
ग्राहकों के अनुभव
सत्तर की उम्र में गुरु से मंत्र लिया, लोगों को देर लगी। दिन उन्होंने मुझ पर छोड़ दिया, और मेरी याददाश्त अब पहले जैसी नहीं, तो निकलवा कर लिखवा लिया।