हरियाली तीज 2027
बुधवार, 4 अगस्त 2027
पूजा विधि
यह व्रत कौन करे?
- सुहागिन स्त्रियाँ: विवाहित स्त्रियाँ अपने पति की दीर्घायु और अच्छे स्वास्थ्य तथा सुखी वैवाहिक जीवन (अखंड सौभाग्य) के लिए यह व्रत रखती हैं।
- अविवाहित कन्याएँ: अविवाहित कन्याएँ माता पार्वती से अच्छे और स्नेही पति का वरदान माँगती हैं।
पूजा का समय
- प्रातः की तैयारी: सुबह जल्दी, ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले का समय) में स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
- पूजा मुहूर्त: शिव-पार्वती की पूजा सुबह या शाम को प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में की जाती है; परिवारों में रीति अलग हो सकती है। अपने शहर का पूजा मुहूर्त इसी पृष्ठ पर देखें।
- झूले और गीत: दोपहर और शाम को स्त्रियाँ एकत्र होकर तीज के गीत गाती हैं और झूला झूलती हैं।
- व्रत खोलना: शाम की पूजा के बाद, या अगली सुबह, जैसी आपके परिवार की परंपरा हो।
पर्व के बारे में
हरियाली तीज उत्तर भारत का अत्यंत प्रिय पर्व है, जो बरसात की हरियाली के मौसम में मनाया जाता है और जिसमें स्त्रियाँ माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। यह पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
व्रत कथा (शिव और पार्वती की कथा)
एक समय की बात है, देवी सती ने अपने प्राण त्याग दिए और फिर राजा हिमवान की पुत्री पार्वती के रूप में जन्मीं। बचपन से ही उनकी इच्छा भगवान शिव को पति रूप में पाने की थी, और उन्होंने हिमालय के वनों में कठोर तप शुरू किया, जिसमें वे केवल पत्तों और वायु पर रहती थीं।
उनके पिता को उनकी इच्छा का पता नहीं था। ऋषि नारद की सलाह पर उन्होंने पार्वती का विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया। पार्वती का हृदय टूट गया और उन्होंने अपना दुख अपनी सखियों को बताया। सखियाँ उन्हें गहरे वन में ले गईं, जहाँ पार्वती ने एक गुफा में अपनी तपस्या जारी रखी, रेत का शिवलिंग बनाकर दिन-रात उसकी पूजा की।
उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव उनके सामने प्रकट हुए और बोले: "तुम्हारी तपस्या से मैं प्रसन्न हूँ। मैं तुम्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार करता हूँ।" यह समाचार सुनकर हिमवान ने सहर्ष स्वीकृति दी और दोनों का विवाह हुआ। माना जाता है कि इस मिलन को श्रावण शुक्ल तृतीया पर आशीर्वाद मिला।
इस दिन व्रत रखने वाली स्त्रियों की भक्ति से प्रसन्न होकर जगदंबा उन्हें लंबा सुहाग और वैसा ही प्रेम और साथ देती हैं जैसा शिव और पार्वती में है। उसी दिन से स्त्रियाँ हरे वस्त्र पहनकर, गीत गाकर और बरसात में झूला झूलकर हरियाली तीज का उत्सव मनाती हैं।
पूजा सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एकत्र कर लें:
- मूर्तियाँ / चित्र: भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मिट्टी या रेत की मूर्तियाँ, या एक फ़्रेम किया हुआ चित्र
- तिलक और पवित्र चूर्ण: रोली, कुमकुम, अक्षत और चंदन का लेप
- दीपक और प्रकाश: घी और रुई की बत्ती वाला मिट्टी का दीपक, और धूप
- पवित्र जल का पात्र: ताज़े जल से भरा कलश या छोटा पात्र
- भोग (नैवेद्य): घेवर, मालपुआ, खीर और फल
- सुहाग सामग्री (श्रृंगार): हरी चूड़ियाँ, सिंदूर, मेहंदी, बिंदी, लाल या हरी साड़ी या दुपट्टा, तथा बेलपत्र (बिल्व पत्र) के साथ धतूरे के फूल और कलावा
पूजा विधि (चरण-दर-चरण)
विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के लिए इन चरणों का ध्यान से पालन करें:
चरण 1: प्रातः की तैयारी और संकल्प
- ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ, शुभ वस्त्र पहनें (हो सके तो हरे, लाल या पीले)।
- दाएँ हाथ की हथेली में थोड़ा जल लेकर संकल्प (पवित्र प्रण) लें: "हे माता पार्वती और भगवान शिव, आज मैं अपने पति और परिवार की दीर्घायु और कल्याण के लिए यह व्रत रख रही हूँ। मुझे शुद्ध भक्ति के साथ यह व्रत पूरा करने की शक्ति दें।"
- दिन भर व्रत रखें। कई स्त्रियाँ निर्जला व्रत (बिना जल के) रखती हैं, जबकि कुछ केवल फल और जल लेती हैं (परिवारों में रीति अलग हो सकती है)।
चरण 2: पूजा की वेदी तैयार करना
- अपने कमरे का ईशान कोण या पूर्वी दीवार स्वच्छ करें।
- शिव, पार्वती और गणेश की मूर्तियाँ साफ़ कपड़े से ढकी लकड़ी की चौकी पर रखें।
- मूर्तियों के पास चावल के दानों के छोटे ढेर पर जल से भरा कलश रखें और उसे कलावे से सजाएँ।
चरण 3: पूजन विधि
- दीपक जलाना: शिव और पार्वती के सामने घी का दीपक और धूप जलाएँ।
- तिलक लगाना: मूर्तियों और कलश पर रोली, कुमकुम, अक्षत और चंदन का लेप लगाएँ।
- फूल और पत्ते चढ़ाना: भगवान शिव को ताज़े फूल और बेलपत्र चढ़ाएँ, और माता पार्वती को सुहाग सामग्री अर्पित करें।
- नैवेद्य अर्पित करना: घेवर, मालपुआ, खीर और फल देवताओं के सामने रखें।
चरण 4: व्रत कथा का पाठ
- दाएँ हाथ में कुछ चावल के दाने और कुछ फूलों की पंखुड़ियाँ लें।
- वेदी के सामने श्रद्धा से बैठें और पूरे ध्यान और भक्ति के साथ हरियाली तीज व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- कथा पूरी होने पर दाने देवताओं के चरणों में और कलश के आधार पर अर्पित करें।
चरण 5: आरती और तीज का उत्सव
- जलते हुए घी के दीपक से शिव-पार्वती की आरती करें और भजन गाएँ।
- स्त्रियाँ हरे वस्त्र पहनती हैं, हाथों पर मेहंदी रचाती हैं और एकत्र होकर तीज के गीत गाती हैं।
- इस दिन की परंपरा के अनुसार पेड़ों और बरामदों में बँधे झूलों का आनंद लें।
चरण 6: आशीर्वाद लेना और व्रत खोलना
- परिवार के बड़ों के, विशेषकर सासू माँ के, चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें (चरण स्पर्श)। कई बहुएँ उन्हें वस्त्र और मिठाई भेंट करती हैं।
- मीठा प्रसाद परिवार के सदस्यों में बाँटें।
- प्रसाद और सादे सात्त्विक भोजन से अपना व्रत खोलें।
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