कजरी तीज 2027

शुक्रवार, 20 अगस्त 2027

पूजा विधि


यह व्रत कौन करे?

  • सुहागिन स्त्रियाँ: विवाहित स्त्रियाँ पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुख तथा परिवार की सुख-शांति के लिए यह व्रत रखती हैं (अखंड सौभाग्य)।
  • अविवाहित कन्याएँ: अविवाहित कन्याएँ भी यह व्रत करती हैं और सुयोग्य जीवनसाथी की प्रार्थना करती हैं (योग्य वर प्राप्ति)।

पूजा का समय

  • प्रातः संकल्प: संकल्प सुबह ब्रह्म मुहूर्त में लिया जाता है और व्रत पूरे दिन रखा जाता है।
  • पूजा मुहूर्त: नीमड़ी माता की मुख्य पूजा संध्या को, सूर्यास्त के बाद की जाती है; अपने शहर का पूजा मुहूर्त इसी पृष्ठ पर देखें।
  • चंद्र दर्शन: चंद्रमा के आपके शहर में उदय होने के बाद ही उसके दर्शन करें और अर्घ्य दें; चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने शहर का चंद्रोदय समय इसी पृष्ठ पर देखें।
  • व्रत खोलना: चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद सत्तू से व्रत खोला जाता है।

पर्व के बारे में

कजरी तीज उत्तर भारत का एक अत्यंत प्रिय पर्व है, जिसमें स्त्रियाँ अपने परिवार की कुशलता के लिए उपवास रखती हैं और नीमड़ी माता तथा चंद्रमा की पूजा करती हैं। यह पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।


व्रत कथा (निर्धन ब्राह्मण और सत्तू की कथा)

बहुत समय पहले एक छोटे से नगर में एक निर्धन ब्राह्मण और उसकी पत्नी रहते थे। कजरी तीज का दिन आया तो पत्नी ने व्रत रखने का निश्चय किया और पति से कहा कि वह सत्तू ले आए, ताकि वह शाम को व्रत खोल सके।

ब्राह्मण के पास धन नहीं था, इसलिए वह आधी रात को एक साहूकार की दुकान पर गया। वहाँ उसने चुपचाप चने, घी और चीनी से उतना सत्तू बना लिया, जितना उसकी पत्नी को चाहिए था। आवाज़ से दुकानदार जाग गया, उसने ब्राह्मण को पकड़ लिया और पूछा कि वह क्या कर रहा है।

ब्राह्मण ने सच-सच बता दिया: "मेरे पास धन नहीं है, पर आज मेरी पत्नी का व्रत है और उसे व्रत खोलने के लिए सत्तू चाहिए। मैं बस इसी के लिए आया था।" उसकी सच्चाई से दुकानदार का मन पिघल गया। उसने ब्राह्मण की पत्नी को अपनी बहन माना और सत्तू के साथ उसके लिए उपहार और वस्त्र देकर ब्राह्मण को घर भेज दिया।

उस रात पत्नी ने चंद्रमा की पूजा की, अर्घ्य दिया और सत्तू से अपना व्रत खोला। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर नीमड़ी माता ने दंपती को सुख और समृद्धि का आशीर्वाद दिया। तभी से स्त्रियाँ अपने परिवार की लंबी आयु और कुशलता के लिए कजरी तीज का व्रत रखती आ रही हैं।


पूजा सामग्री

संध्या की पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एकत्र कर लें:

  • प्रतिमा / मिट्टी का तालाब: नीम की टहनी के साथ मिट्टी और गोबर से बना एक छोटा तालाब, अथवा नीमड़ी माता का चित्र
  • तिलक और पूजन सामग्री: रोली, कुमकुम, अक्षत और मेहंदी
  • दीप: पीतल या मिट्टी का दीपक, घी और रुई की बाती
  • जल पात्र: अर्घ्य के लिए ताज़े जल, थोड़े दूध और एक चाँदी के सिक्के से भरा छोटा पात्र
  • नैवेद्य: सत्तू (भुने चने का आटा), घी, गुड़ और मिठाई
  • पूजन के अन्य सामान: नीम की पत्तियाँ, फूल, कलावा और एक चौकी

पूजा विधि (चरण-दर-चरण)

विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के लिए इन चरणों का ध्यान से पालन करें:

चरण 1: प्रातःकालीन तैयारी और संकल्प

  1. ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ, शुभ वस्त्र पहनें (हो सके तो हरे, लाल या पीले रंग के; काले वस्त्र न पहनें)।
  2. दाएँ हाथ की हथेली में थोड़ा जल लेकर संकल्प करें: "हे माता नीमड़ी, आज मैं अपने परिवार की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुख के लिए यह व्रत रखती हूँ। मुझे शुद्ध भक्ति के साथ यह व्रत पूरा करने की शक्ति दें।"
  3. पूरे दिन उपवास रखें, परंपरा के अनुसार शाम को चंद्रमा के दर्शन होने तक।

चरण 2: पूजा स्थान तैयार करना (अपराह्न के बाद)

  1. पूजा का स्थान स्वच्छ करें और लकड़ी की चौकी पर साफ़ कपड़ा बिछाकर उसे रखें।
  2. चौकी पर मिट्टी से एक छोटा तालाब बनाएँ और उसके पास नीम की एक टहनी लगाएँ।
  3. तालाब में थोड़ा दूध और जल डालें और उसके पास एक जलता हुआ दीपक रखें।

चरण 3: संध्याकालीन पूजन विधि

  1. दीपक जलाना: घी का दीपक जलाकर नीमड़ी माता के सामने रखें।
  2. तिलक लगाना: नीम की टहनी और तालाब पर रोली, कुमकुम और अक्षत लगाएँ।
  3. फूल और सूत्र अर्पित करना: ताज़े फूल चढ़ाएँ और नीम की टहनी पर कलावा का एक टुकड़ा बाँधें।
  4. नैवेद्य अर्पित करना: देवी के सामने सत्तू, गुड़ और मिठाई रखें।

चरण 4: व्रत कथा का पाठ

  1. दाएँ हाथ में कुछ चावल के दाने और फूलों की कुछ पंखुड़ियाँ लें।
  2. चौकी के सामने श्रद्धा से बैठकर पूरे ध्यान और भक्ति के साथ कजरी तीज व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  3. कथा पूरी होने पर चावल और पंखुड़ियाँ नीम की टहनी के पास अर्पित करें।

चरण 5: आरती और अर्घ्य (चंद्र दर्शन)

  1. जलते घी के दीपक से नीमड़ी माता की आरती करें और भक्ति-भजन गाएँ।
  2. चंद्रमा के उदय होने पर जल का पात्र लेकर बाहर जाएँ और चंद्रमा के दर्शन करें।
  3. अर्घ्य दें (चंद्रमा को देखते हुए धीरे-धीरे जल भूमि पर गिराएँ) और अपने परिवार की लंबी आयु और सुख की प्रार्थना करें।

चरण 6: आशीर्वाद लेना और व्रत खोलना

  1. परिवार के बड़ों के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें (चरण स्पर्श)।
  2. परिवार के सदस्यों में मीठा प्रसाद बाँटें।
  3. सत्तू से व्रत खोलें, फिर सादा सात्त्विक भोजन करें।

ज्ञान केंद्र में और पढ़ें

ज्ञान केंद्र के सभी लेख

आने वाले व्रत और त्योहार

सभी त्योहार देखें
  • बोळ चोथ: 21 अगस्त 2027
  • हल षष्ठी: 23 अगस्त 2027
  • रांधण छठ: 23 अगस्त 2027
  • शीतला सातम: 24 अगस्त 2027
  • कृष्ण जन्माष्टमी: 25 अगस्त 2027
  • गोगा नवमी: 26 अगस्त 2027