जया पार्वती व्रत 2027
शुक्रवार, 16 जुलाई 2027
पूजा विधि
यह व्रत कौन करे?
- कन्याएँ: अविवाहित कन्याएँ सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए माता पार्वती का आशीर्वाद पाने हेतु यह व्रत करती हैं (योग्य वर प्राप्ति)।
- सुहागिन स्त्रियाँ: विवाहित स्त्रियाँ पति की लंबी आयु, स्वास्थ्य और सुख तथा परिवार की सुख-शांति के लिए यह व्रत करती हैं (अखंड सौभाग्य)।
पूजा का समय
- प्रातः संकल्प: व्रत का आरंभ सुबह स्नान के बाद, ब्रह्म मुहूर्त में या सूर्योदय के कुछ समय बाद किया जाता है।
- पूजा मुहूर्त: मुख्य पूजा सुबह या दिन के आरंभिक भाग में की जाती है; अपने शहर का पूजा मुहूर्त इसी पृष्ठ पर देखें।
- पाँच दिन का व्रत: यह व्रत पाँच दिन तक रखा जाता है और पूजा प्रतिदिन दोहराई जाती है (हर दिन उपवास कितना कठोर हो, इसमें परिवारों की परंपरा अलग-अलग होती है)।
- व्रत खोलना: पूजा संपन्न होने के बाद परंपरा के अनुसार बिना नमक और बिना गेहूँ का भोजन किया जाता है।
पर्व के बारे में
जया पार्वती व्रत एक अत्यंत प्रिय पर्व है, जो विशेष रूप से गुजरात में मनाया जाता है। इसमें स्त्रियाँ और कन्याएँ सुखी वैवाहिक जीवन के लिए माता पार्वती की पूजा करती हैं। यह पर्व आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है।
व्रत कथा (वामन और सत्या की कथा)
बहुत समय पहले कौंडिन्य नगर में वामन नाम का एक धर्मपरायण ब्राह्मण अपनी पत्नी सत्या के साथ रहता था। उनके घर में किसी वस्तु की कमी नहीं थी, फिर भी संतान न होने के कारण वे दोनों बहुत दुखी रहते थे।
एक दिन दोनों ने बड़ी श्रद्धा से भगवान शिव की प्रार्थना की। तब आकाशवाणी हुई कि पास के वन में एक शिवलिंग छिपा है, जिसकी कोई पूजा नहीं करता। वामन और सत्या वन में गए, उन्होंने शिवलिंग को खोज निकाला और फूलों तथा प्रार्थना से नियमपूर्वक उसकी पूजा करने लगे। इस प्रकार पाँच वर्ष बीत गए। एक दिन वामन पूजा के लिए फूल चुन रहे थे कि एक साँप ने उन्हें डस लिया और वे वन में अचेत होकर गिर पड़े।
सत्या का हृदय टूट गया और उसने पूरे मन से पति के प्राणों के लिए प्रार्थना की। उसकी सच्ची भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने वामन को फिर से जीवन दिया, और माता पार्वती ने दंपती को सलाह दी: "श्रद्धापूर्वक जया पार्वती व्रत करें। इस व्रत से आपकी सभी मनोकामनाएँ पूरी होंगी।"
दंपती ने पूरी भक्ति से माता के वचनों का पालन किया। उनकी श्रद्धा से प्रसन्न होकर शिव-पार्वती ने उन्हें आशीर्वाद दिया और उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी से स्त्रियाँ और कन्याएँ सुखी और चिरस्थायी वैवाहिक जीवन के लिए माता पार्वती का आशीर्वाद पाने हेतु जया पार्वती व्रत करती आ रही हैं।
पूजा सामग्री
सुबह की पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एकत्र कर लें:
- प्रतिमा / चित्र: शिव-पार्वती का चित्र या मूर्ति, अथवा हाथी (गज) की आकृति के साथ मिट्टी की माता पार्वती की मूर्ति
- ज्वारे (गेहूँ के अंकुर): मिट्टी में पाँच दिन के लिए गेहूँ बोया हुआ एक छोटा गमला
- तिलक और पूजन सामग्री: रोली, कुमकुम और अक्षत
- दीप: पीतल या मिट्टी का दीपक, घी और रुई की बाती
- माला और सजावट: सूत की माला (नागला), फूल और कलावा
- नैवेद्य: फल, मिठाई और बिना नमक तथा बिना गेहूँ के बने पकवान
पूजा विधि (चरण-दर-चरण)
विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के लिए इन चरणों का ध्यान से पालन करें:
चरण 1: प्रातःकालीन तैयारी और संकल्प
- ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ, शुभ वस्त्र पहनें (हो सके तो लाल, पीले या हरे रंग के; काले वस्त्र न पहनें)।
- दाएँ हाथ की हथेली में थोड़ा जल लेकर संकल्प करें: "हे माता पार्वती, आज मैं शुद्ध मन से यह जया पार्वती व्रत आरंभ करती हूँ। मुझे सुखी वैवाहिक जीवन और मेरे परिवार को कुशल-मंगल का आशीर्वाद दें।"
- अपने परिवार की परंपरा के अनुसार उपवास रखें, और पाँचों दिन भोजन में नमक तथा गेहूँ का प्रयोग न करें।
चरण 2: पूजा स्थान तैयार करना
- पूजा का स्थान स्वच्छ करें और लकड़ी की चौकी पर साफ़ लाल कपड़ा बिछाकर उसे रखें।
- चौकी पर शिव-पार्वती का चित्र या मूर्ति रखें और उसके पास ज्वारे का गमला रखें।
- प्रतिमा के पास स्वच्छ जल से भरा कलश या छोटा पात्र रखें।
चरण 3: पूजन विधि
- दीपक जलाना: घी का दीपक जलाकर माता पार्वती के सामने रखें।
- तिलक लगाना: प्रतिमा और ज्वारे पर रोली, कुमकुम और अक्षत लगाएँ।
- फूल और सूत्र अर्पित करना: ताज़े फूल और नागला चढ़ाएँ, तथा गमले पर कलावा का एक टुकड़ा बाँधें।
- नैवेद्य अर्पित करना: देवी के सामने फल और मिठाई रखें।
चरण 4: व्रत कथा का पाठ
- दाएँ हाथ में कुछ चावल के दाने और फूलों की कुछ पंखुड़ियाँ लें।
- चौकी के सामने श्रद्धा से बैठकर पूरे ध्यान और भक्ति के साथ जया पार्वती व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- कथा पूरी होने पर हाथ में रखे चावल और पंखुड़ियाँ देवी के चरणों में अर्पित करें।
चरण 5: आरती और प्रार्थना
- जलते घी के दीपक से माता पार्वती की आरती करें और भक्ति-भजन गाएँ।
- प्रतिदिन ज्वारों में धीरे से जल डालें और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करें।
- अंतिम दिन अनेक परिवार रात भर जागकर भजन गाते हैं (जागरण), और अगले दिन ज्वारों को नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है।
चरण 6: आशीर्वाद लेना और व्रत खोलना
- परिवार के बड़ों के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें (चरण स्पर्श)।
- परिवार के सदस्यों में प्रसाद बाँटें।
- प्रसाद ग्रहण करके और नमक रहित सादा सात्त्विक भोजन करके व्रत खोलें।
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