सकट चौथ 2027

सोमवार, 25 जनवरी 2027

पूजा विधि


यह व्रत कौन करे?

  • माताएँ: मुख्य रूप से माताएँ अपनी संतान के स्वास्थ्य, रक्षा, दीर्घायु और समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं।
  • भगवान गणेश के भक्त: जो परिवार अपने जीवन से विघ्न और संकट दूर करना चाहते हैं, वे भी गणेश जी में आस्था के साथ यह व्रत रखते हैं।

पूजा का समय

  • प्रातःकालीन संकल्प: सुबह तड़के लिया जाता है, जब व्रत आरंभ होता है।
  • संध्या पूजा: भगवान गणेश और सकट माता की पूजा शाम को सूर्यास्त के बाद और चंद्रोदय से पहले की जाती है। अपने शहर का पूजा मुहूर्त इसी पृष्ठ पर देखें।
  • चंद्र दर्शन: चंद्रमा के आपके शहर में उदय होने के बाद ही उसके दर्शन करें और अर्घ्य दें। चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने शहर का चंद्रोदय समय इसी पृष्ठ पर देखें।
  • व्रत का पारण: चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद।

पर्व के बारे में

सकट चौथ उत्तर भारत का श्रद्धापूर्वक मनाया जाने वाला पर्व है, जिसमें माताएँ अपनी संतान के कल्याण के लिए व्रत रखती हैं और भगवान गणेश का पूजन करती हैं। यह पर्व माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है।


व्रत कथा (सकट माता की कथा)

बहुत समय पहले एक नगर में एक कुम्हार रहता था। उसका आवाँ (मिट्टी के बर्तन पकाने की भट्ठी) कितनी भी बार जलाने पर भी उसके बर्तन नहीं पकते थे। रोज़ी-रोटी छिन जाने के डर से वह राजा के पास गया और अपनी परेशानी बताई। राजा ने पुरोहितों को बुलाया, जिन्होंने कहा कि आवाँ तभी पकेगा जब किसी बालक की बलि दी जाएगी।

राजा ने आदेश दिया कि हर घर से बारी-बारी से एक बालक भेजा जाए। जब बारी एक बूढ़ी माता की आई, जिसका केवल एक ही बेटा था, तो उसका हृदय टूट गया। उसके पास बेटे को भेजने के सिवा कोई उपाय नहीं था। विदा करते समय उसने बेटे को एक सुपारी और कुछ दूर्वा दी और कहा कि वह पूरे मन से सकट माता और भगवान गणेश का स्मरण करे।

माता ने कहा: "डरना मत, बेटा। जब वे तुम्हें आवाँ में बैठाएँ, तब सकट माता से प्रार्थना करना। जो भी श्रद्धा से उन्हें पुकारता है, वे उसकी रक्षा करती हैं।" बूढ़ी माता ने स्वयं उस दिन व्रत रखा और रात भर अपने बेटे के लिए प्रार्थना की। अगली सुबह कुम्हार ने आवाँ खोला तो उसके बर्तन भली-भाँति पके हुए थे, और बालक भीतर सुरक्षित बैठा मुस्कुरा रहा था।

सब लोग सकट माता की महिमा देखकर चकित रह गए। माता की श्रद्धा और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान गणेश ने उसके जीवन का दुख दूर कर दिया। तभी से माताएँ अपनी संतान की रक्षा और दीर्घायु के लिए सकट चौथ का व्रत रखती आ रही हैं।


पूजा सामग्री

शाम की पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एकत्र कर लें:

  • चित्र / मूर्ति: भगवान गणेश (और सकट माता) का चित्र या मूर्ति
  • तिलक और पूजन सामग्री: रोली, कुमकुम और अक्षत
  • दीपक और प्रकाश: घी और रुई की बाती के साथ पीतल या मिट्टी का दीपक
  • जल पात्र: चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए ताज़े जल से भरा कलश या लोटा
  • नैवेद्य: तिलकुटा (तिल और गुड़), तिल के लड्डू, फल, और उबली हुई शकरकंद
  • पूजा की अन्य वस्तुएँ: फूल, दूर्वा, कलावा और सुपारी

पूजा विधि (चरण-दर-चरण)

विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के लिए इन चरणों का ध्यान से पालन करें:

चरण 1: प्रातःकालीन तैयारी और संकल्प

  1. ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें, स्नान करें और साफ़, शुभ वस्त्र पहनें (हो सके तो लाल या पीले)।
  2. दाएँ हाथ की हथेली में थोड़ा जल लेकर संकल्प करें: "हे भगवान गणेश और सकट माता, आज मैं अपनी संतान के स्वास्थ्य, दीर्घायु और कल्याण के लिए यह व्रत रखती हूँ। मुझे शुद्ध भक्ति से यह व्रत पूरा करने की शक्ति दें।"
  3. शाम को चंद्रमा के दर्शन होने तक दिन भर व्रत रखें, परंपरा के अनुसार अन्न ग्रहण न करें।

चरण 2: पूजा की चौकी सजाना (संध्या)

  1. अपने घर या पूजा स्थान के ईशान कोण को साफ़ करें।
  2. साफ़ कपड़े से ढकी लकड़ी की चौकी रखें और उस पर भगवान गणेश का चित्र स्थापित करें।
  3. चित्र के पास जल से भरा कलश या लोटा रखें, साथ में नैवेद्य के लिए बनाया हुआ तिलकुटा भी रखें।

चरण 3: संध्या की पूजा करना

  1. दीपक जलाना: घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश के सामने रखें।
  2. तिलक लगाना: चित्र और कलश को रोली, कुमकुम और अक्षत लगाएँ।
  3. फूल और दूर्वा चढ़ाना: ताज़े फूल और दूर्वा चढ़ाएँ, और कलश पर कलावे का एक टुकड़ा बाँधें।
  4. नैवेद्य अर्पित करना: भगवान गणेश को तिलकुटा, तिल के लड्डू और फल अर्पित करें।

चरण 4: व्रत कथा का पाठ

  1. दाएँ हाथ में थोड़े चावल के दाने और कुछ फूलों की पंखुड़ियाँ लें।
  2. चौकी के सामने श्रद्धा से बैठकर पूरे ध्यान और भक्ति के साथ सकट चौथ व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
  3. कथा पूरी होने पर चावल और पंखुड़ियाँ भगवान गणेश के चरणों में अर्पित करें।

चरण 5: आरती और अर्घ्य (चंद्र दर्शन)

  1. जलते हुए घी के दीपक से भक्ति गीत गाते हुए गणेश जी की आरती करें।
  2. आपके शहर में चंद्रमा के उदय होने पर जल का पात्र लेकर बाहर जाएँ।
  3. संतान की दीर्घायु और सुख की प्रार्थना करते हुए चंद्रमा को अर्घ्य दें (चंद्रमा को देखते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करें)।

चरण 6: आशीर्वाद लेना और व्रत खोलना

  1. परिवार के बड़ों के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लें।
  2. तिलकुटे का प्रसाद परिवार के सदस्यों और बच्चों में बाँटें।
  3. प्रसाद ग्रहण करके और सादे सात्त्विक भोजन से व्रत खोलें।

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