विवाह पंचमी 2026
सोमवार, 14 दिसंबर 2026
पूजा विधि
यह पूजा कौन करे?
- भगवान राम और माता सीता के भक्त: परिवार और भक्तजन भगवान राम और माता सीता के दिव्य विवाह का स्मरण करने और सुखी घर के लिए उनका आशीर्वाद पाने के लिए यह दिन मनाते हैं।
- विवाहित दंपति: राम और सीता के आदर्श पर चलते हुए दंपति अपने वैवाहिक जीवन में प्रेम, आपसी समझ और अटूट बंधन की प्रार्थना करते हैं।
- योग्य जीवनसाथी की कामना करने वाले: अविवाहित युवक-युवतियाँ अच्छे जीवनसाथी और समय पर सुखी विवाह (विवाह सुख) की प्रार्थना करते हैं।
पूजा का समय
- प्रातःकालीन तैयारी: स्नान, संकल्प और पूजा का आरंभ सुबह ब्रह्म मुहूर्त (भोर से पहले का समय) से शुरू होकर होता है।
- पूजा मुहूर्त: मुख्य पूजा और राम-सीता का प्रतीकात्मक विवाह सूर्योदय के बाद सुबह के समय में किया जाता है (कई मंदिरों में यह पूर्वाह्न तक चलता है)। अपने शहर का पूजा मुहूर्त इसी पृष्ठ पर देखें।
- सायंकालीन आरती: कई परिवार संध्या के समय फिर दीपक जलाते हैं और रामायण की चौपाइयाँ गाते हैं।
पर्व के बारे में
विवाह पंचमी भगवान राम और माता सीता के पावन विवाह का स्मरण कराने वाला अत्यंत पूजनीय पर्व है, जो पूरे भारत में, विशेषकर मिथिला, अयोध्या और नेपाल में मनाया जाता है। यह पर्व मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।
कथा (राम-सीता विवाह की कथा)
बहुत समय पहले मिथिला राज्य में राजा जनक को हल चलाते समय खेत की कूँड़ में एक नन्ही कन्या मिली। उन्होंने उसका नाम सीता रखा और बड़े स्नेह से उसका पालन-पोषण किया। जनक की सभा में भगवान शिव का एक विशाल धनुष रखा था, जिसे कोई उठा तक नहीं पाता था।
जब सीता विवाह योग्य हुईं, तो राजा जनक ने घोषणा की कि जो शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा, उसी से सीता का विवाह होगा। अनेक राजा और राजकुमार आए, पर कोई उसे हिला भी न सका। तब ऋषि विश्वामित्र अयोध्या के राजकुमारों राम और लक्ष्मण को सभा में लेकर आए।
ऋषि विश्वामित्र ने राम को आशीर्वाद दिया और शिव का धनुष उठाने को कहा। राम ने सहजता से धनुष उठा लिया और प्रत्यंचा चढ़ाते समय वह भीषण ध्वनि के साथ टूट गया। राजा जनक आनंद से भर उठे और उन्होंने राजा दशरथ को विवाह के लिए मिथिला आमंत्रित किया।
मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को राम और सीता का भव्य समारोह में विवाह हुआ, और उसी अवसर पर राम के भाइयों का विवाह सीता की बहन और चचेरी बहनों से हुआ। दिव्य दंपति की भक्ति और पवित्रता से प्रसन्न होकर सभी लोग आनंदित हुए। तब से विवाह पंचमी दिव्य विवाह के दिन के रूप में मनाई जाती है, और भक्तों को सुखी वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद मिलता है।
पूजा सामग्री
सुबह की पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एकत्र कर लें:
- चित्र / मूर्ति: भगवान राम और माता सीता का साथ का चित्र या मूर्ति, हो सके तो लक्ष्मण और हनुमान के साथ
- तिलक और पवित्र चूर्ण: रोली, कुमकुम, चंदन और अक्षत
- दीप और रोशनी: पीतल या मिट्टी का दीपक, घी और रुई की बाती, तथा अगरबत्ती
- विवाह की भेंट: देवताओं के लिए पीले या लाल नए वस्त्र, चुनरी, चूड़ियाँ, सिंदूर और फूलों की माला (जयमाला)
- नैवेद्य: खीर, फल, मिठाई और तुलसी दल
- पूजा की अन्य वस्तुएँ: फूल, कलावा, पान और स्वच्छ जल का एक छोटा पात्र
पूजा विधि (चरण-दर-चरण)
विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के लिए इन चरणों का ध्यान से पालन करें:
चरण 1: प्रातःकालीन तैयारी और संकल्प
- ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ, शुभ वस्त्र पहनें (हो सके तो पीले या लाल)।
- दाएँ हाथ की हथेली में थोड़ा जल लेकर संकल्प करें: "हे भगवान राम और माता सीता, आज आपके पावन विवाह के दिन हम आपकी पूजा करते हैं। हमारे घर को प्रेम, सद्भाव और आपकी दिव्य उपस्थिति की शांति का आशीर्वाद दें।"
- कई भक्त दिन भर सादा उपवास रखते हैं या केवल सात्त्विक भोजन करते हैं (परंपरा हर परिवार में अलग हो सकती है)।
चरण 2: पूजा की चौकी सजाना (सुबह)
- पूजा का स्थान साफ़ करें और लकड़ी की चौकी पर स्वच्छ पीला या लाल कपड़ा बिछाएँ।
- उस पर भगवान राम और माता सीता का चित्र या मूर्ति रखें और उनके पास लक्ष्मण और हनुमान को स्थापित करें।
- वेदी के पास स्वच्छ जल से भरा एक छोटा कलश रखें और उसके ऊपर कुछ आम के पत्ते रखें।
चरण 3: पूजन-क्रम
- दीपक जलाना: देवताओं के सामने घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएँ।
- तिलक लगाना: भगवान राम और माता सीता को रोली, चंदन और अक्षत अर्पित करें।
- विवाह की भेंट चढ़ाना: माता सीता को नए वस्त्र, चुनरी, चूड़ियाँ और सिंदूर तथा भगवान राम को माला अर्पित करें।
- नैवेद्य अर्पित करना: खीर, फल और मिठाई तुलसी दल के साथ देवताओं के सामने रखें।
चरण 4: प्रतीकात्मक विवाह और कथा
- देवताओं को जयमाला पहनाएँ और विवाह-समारोह की तरह कलश पर कलावा का एक टुकड़ा बाँधें।
- वेदी के सामने श्रद्धा से बैठकर राम-सीता विवाह के रामचरितमानस के प्रसंग या विवाह पंचमी की कथा पढ़ें या सुनें।
- "श्री राम जय राम जय जय राम" का जाप करें या राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करें (जैसा कि कई घरों में होता है)।
चरण 5: आरती और प्रार्थना
- जलते घी के दीपक से भगवान राम और माता सीता की आरती करें और भजन गाएँ।
- उनके चरणों में फूल चढ़ाएँ और अपने परिवार में सद्भाव, प्रेम और सुखी वैवाहिक जीवन की प्रार्थना करें।
- योग्य जीवनसाथी की कामना करने वाले सीता-राम से सच्चे मन से अच्छे साथी की प्रार्थना करें।
चरण 6: आशीर्वाद लेना और प्रसाद बाँटना
- परिवार के बड़ों के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें (चरण स्पर्श)।
- मीठा प्रसाद परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों में बाँटें।
- प्रसाद ग्रहण करके और सादा सात्त्विक भोजन करके व्रत का समापन करें।
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