अट्ला तद्दे 2026
बुधवार, 28 अक्टूबर 2026
पूजा विधि
यह व्रत कौन करे?
- विवाहित महिलाएँ: विवाहित महिलाएँ पति की लंबी आयु और कुशलता तथा परिवार की सुख-शांति के लिए यह व्रत रखती हैं।
- अविवाहित कन्याएँ: युवा कन्याएँ अच्छे और स्नेही पति (सुमंगली भाग्य) के लिए गौरी माता का आशीर्वाद पाने हेतु यह व्रत करती हैं।
पूजा का समय
- प्रातःकालीन भोजन: व्रत शुरू होने से पहले, सूर्योदय से पूर्व के समय में दही-चावल और गोंगूरा (अंबाड़ी की पत्तियों) का हल्का भोजन किया जाता है।
- गौरी पूजा: पूजा शाम को चंद्रमा के उदय से पहले, प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में की जाती है। अपने शहर का पूजा मुहूर्त इसी पृष्ठ पर देखें।
- चंद्र दर्शन: चंद्रमा के आपके शहर में उदय होने के बाद ही उसके दर्शन करें और प्रार्थना करें; चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने शहर का चंद्रोदय समय इसी पृष्ठ पर देखें।
- व्रत खोलना: चंद्र दर्शन और पूजा के बाद अट्लु खाकर व्रत खोला जाता है।
पर्व के बारे में
अट्ला तद्दे आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का एक बहुत प्रिय पर्व है, जिसमें महिलाएँ उपवास रखती हैं और गौरी माता की पूजा करती हैं। यह पर्व आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है।
व्रत कथा (राजकुमारी और नकली चाँद की कथा)
बहुत समय पहले एक राजकुमारी थी, जिसे उसके भाई बहुत प्यार करते थे। उसने अट्ला तद्दे का व्रत रखा, दिन भर अन्न-जल के बिना रही, और चंद्रमा के उदय की प्रतीक्षा करने लगी ताकि व्रत खोल सके। शाम ढलते-ढलते भूख से वह कमज़ोर और थकी हुई हो गई।
उसका कष्ट भाइयों से देखा न गया। उन्होंने एक लाठी पर दर्पण बाँधा और उसे अग्नि के सामने ऊँचा उठा दिया, जिससे वह उगते चंद्रमा जैसा दिखे। उन्होंने बहन को जगाकर नकली चंद्रमा दिखाया, और उसने चंद्रमा उदय हुआ मानकर व्रत खोल लिया। व्रत ठीक से पूरा न होने के कारण उसके लिए विवाह के प्रस्ताव केवल अनुपयुक्त रिश्तों के ही आए।
दुखी होकर राजकुमारी ने गौरी माता से प्रार्थना की। उसकी भक्ति से द्रवित होकर भगवान शिव और माता पार्वती उसके सामने प्रकट हुए और बोले: "अट्ला तद्दे का व्रत फिर से करो, इस बार पूरी श्रद्धा के साथ। सच्चे चंद्रमा के उदय होने तक उपवास रखो, गौरी देवी की पूजा करो और फिर व्रत खोलो।"
राजकुमारी ने पूरे मन से यह सलाह मानी और व्रत विधिपूर्वक किया। उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर देवी ने उसे आशीर्वाद दिया, और उसका विवाह एक योग्य और स्नेही राजकुमार से हुआ। तभी से महिलाएँ सुखी वैवाहिक जीवन और स्नेहमय परिवार के लिए अट्ला तद्दे का व्रत रखती हैं, गौरी माता की पूजा करती हैं और चंद्र दर्शन के बाद ही भोजन करती हैं।
पूजा सामग्री
शाम की पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एकत्र कर लें:
- चित्र / मूर्ति: गौरी माता का चित्र या मूर्ति
- तिलक और पूजन सामग्री: हल्दी, कुमकुम और अक्षत
- दीपक और ज्योति: पीतल या मिट्टी का दीपक, घी या तेल और रुई की बाती
- नैवेद्य: अट्लु (चावल और उड़द दाल से बना दोसे जैसा चीला), फल और मिठाइयाँ
- फूल और पत्ते: देवी के लिए ताज़े फूल और माला
- पूजा के अन्य सामान: जल से भरा कलश, तोरणम (पूजा का धागा), चूड़ियाँ, और पान के पत्ते व सुपारी (तांबूलम)
पूजा विधि (चरण-दर-चरण)
विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के लिए इन चरणों का ध्यान से पालन करें:
चरण 1: प्रातःकालीन तैयारी और संकल्प
- सूर्योदय से पहले जल्दी उठें, गोंगूरा के साथ दही-चावल का हल्का भोजन करें, स्नान करें और स्वच्छ, शुभ वस्त्र पहनें।
- दाएँ हाथ की हथेली में थोड़ा जल लें और संकल्प करें: "हे जगदंबा माता गौरी, आज मैं श्रद्धा के साथ यह व्रत रख रही हूँ। मेरे परिवार को स्वास्थ्य, सुख और लंबे, समृद्ध वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दें।"
- दिन भर उपवास रखें। परंपरा के अनुसार शाम को चंद्र दर्शन तक उपवास रखा जाता है।
चरण 2: पूजा वेदी की तैयारी (तीसरे पहर)
- अपने घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व का कोना) या पूजा स्थान को साफ़ करें।
- गौरी देवी का चित्र या मूर्ति स्वच्छ वस्त्र से ढकी लकड़ी की चौकी पर स्थापित करें।
- देवी के पास जल से भरा कलश रखें और वेदी को फूलों तथा आम के पत्तों से सजाएँ।
चरण 3: सायंकालीन पूजन
- दीपक जलाना: दीपक जलाकर गौरी माता के सामने रखें।
- तिलक लगाना: देवी को हल्दी, कुमकुम और अक्षत अर्पित करें।
- फूल और धागा अर्पित करना: ताज़े फूल चढ़ाएँ और अपनी कलाई पर या कलश पर धागा बाँधें।
- नैवेद्य अर्पित करना: देवी के सामने अट्लु का एक सेट और फल रखें।
चरण 4: व्रत कथा का पाठ
- दाएँ हाथ में कुछ चावल के दाने और कुछ फूलों की पंखुड़ियाँ लें।
- वेदी के सामने श्रद्धापूर्वक बैठें और पूरे ध्यान और भक्ति से अट्ला तद्दे की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- कथा पूरी होने पर चावल के दाने और पंखुड़ियाँ देवी के चरणों में अर्पित करें।
चरण 5: आरती और चंद्र दर्शन
- जलते हुए दीपक से भक्ति-भजन गाते हुए गौरी आरती करें।
- रात में चंद्रमा के उदय होने पर बाहर जाकर श्रद्धा से उसके दर्शन करें।
- चंद्रमा और देवी से प्रार्थना करें और अपने परिवार की कुशलता माँगें।
चरण 6: आशीर्वाद लेना और व्रत खोलना
- परिवार के बड़ों के चरण छूकर उनका आशीर्वाद लें (चरण स्पर्श)।
- सुहागिन महिलाओं को अट्लु, फल और तांबूलम दें (वायनम) और प्रसाद परिवार के साथ बाँटें।
- अट्लु और सादा भोजन खाकर व्रत खोलें।
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आने वाले व्रत और त्योहार
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- केदार गौरी व्रतरविवार
- सोमवती अमावस्यासोमवार
- चित्रगुप्त पूजाबुधवार
- छठ पूजा16 नवंबर 2026 तक
- दीपावली: 6 नवंबर 2026 – 11 नवंबर 2026
- काली पूजा: 8 नवंबर 2026
- केदार गौरी व्रत: 8 नवंबर 2026
- सोमवती अमावस्या: 9 नवंबर 2026
- चित्रगुप्त पूजा: 11 नवंबर 2026
- छठ पूजा: 13 नवंबर 2026 – 16 नवंबर 2026