काली पूजा 2026
रविवार, 8 नवंबर 2026
पूजा विधि
यह पूजा कौन करे?
- माँ काली के भक्त: परिवार और भक्तजन इस रात माँ काली की पूजा उनकी सुरक्षा, शक्ति तथा भय और नकारात्मकता के निवारण (भय निवारण) के लिए करते हैं।
- शक्ति के साधक: शाक्त परंपरा को मानने वाले लोग साहस, आंतरिक बल और माँ की कृपा पाने के लिए रातभर पूजा करते हैं।
पूजा का समय
- प्रातःकालीन तैयारी: सुबह जल्दी स्नान करें और हल्के उपवास के साथ दिन की शुरुआत करें। कई भक्त पूजा पूरी होने तक उपवास रखते हैं।
- संध्या के दीपक: सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में माँ के स्वागत के लिए घर में दीपक जलाए जाते हैं।
- मुख्य पूजा मुहूर्त: काली पूजा रात में निशीथ काल (लगभग मध्यरात्रि) में की जाती है। अपने शहर का पूजा मुहूर्त इसी पृष्ठ पर देखें।
- पूजा का समापन: मध्यरात्रि की आरती और पुष्पांजलि के बाद पूजा संपन्न होती है (कुछ परिवार भोर तक पूजा जारी रखते हैं)।
पर्व के बारे में
काली पूजा, जिसे श्यामा पूजा भी कहते हैं, बंगाल का एक अत्यंत प्रिय पर्व है। इसमें भक्त माँ काली की पूजा बुराई का नाश करने वाली और अपनी संतानों की रक्षक के रूप में करते हैं। यह पर्व कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है।
कथा (माँ काली और रक्तबीज की कथा)
एक बार की बात है, रक्तबीज नाम के दैत्य ने स्वर्ग और पृथ्वी को त्रस्त कर रखा था। उसे वरदान मिला था कि उसके शरीर से गिरने वाली रक्त की हर बूँद से उसी जैसा बलशाली एक और दैत्य जन्म लेगा। देवताओं ने उससे बहुत युद्ध किया, पर व्यर्थ। हर घाव से रणभूमि में और रक्तबीज उत्पन्न हो जाते थे।
भयभीत देवताओं ने माँ दुर्गा से सहायता की प्रार्थना की। युद्ध के बीच माँ का क्रोध श्यामवर्ण, भयंकर काली के रूप में प्रकट हुआ। उनकी जिह्वा बाहर निकली हुई थी और नेत्र अंगारे की तरह दहक रहे थे। माँ ने देखा कि दैत्य का अंत तभी होगा, जब उसका रक्त कभी भूमि को न छुए।
जगज्जननी रणभूमि में उतरीं और पूरे बल से युद्ध किया। उन्होंने रक्तबीज पर बार-बार प्रहार किया और उसके रक्त की हर बूँद को धरती पर गिरने से पहले ही पी लिया। देवताओं ने प्रार्थना की: "हे माँ, इस अनर्थ का अंत केवल आप ही कर सकती हैं। तीनों लोकों की रक्षा करें और हमें भय से मुक्त करें।" रक्तबीज मारा गया, पर काली का क्रोध इतना प्रचंड था कि धरती काँपने लगी। तब भगवान शिव उनके मार्ग में लेट गए और जब माँ ने उन पर चरण रखा, तब उनका क्रोध शांत हुआ।
अपनी संतानों की भक्ति से प्रसन्न होकर माँ ने वचन दिया कि जो भी सच्चे मन से उनकी पूजा करेगा, उसकी वे रक्षा करेंगी। तभी से भक्त अमावस्या की अँधेरी रात में माँ काली की पूजा उनकी सुरक्षा और शक्ति पाने के लिए करते हैं।
पूजा सामग्री
मध्यरात्रि की पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एकत्र कर लें:
- मूर्ति / चित्र: माँ काली की मूर्ति या चित्र, स्वच्छ चौकी पर रखा हुआ
- तिलक और पूजन सामग्री: रोली, कुमकुम, सिंदूर और अक्षत
- दीपक और प्रकाश: सरसों के तेल या घी के मिट्टी के दीपक और धूप (अगरबत्ती)
- फूल: लाल गुड़हल (जवा) के फूल और मालाएँ, हो सके तो 108 फूल, और बेलपत्र
- नैवेद्य: फल, मिठाई, खिचड़ी, पायेश (खीर) और उबली हुई साबुत उड़द (माषकलाई) प्रसाद के रूप में (कुछ परिवारों की परंपरा में मांसाहारी नैवेद्य भी चढ़ाया जाता है)
- पूजा के अन्य सामान: जल से भरा कलश, आम के पत्ते, नारियल, कलावा और कपूर
पूजा विधि (चरण-दर-चरण)
विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के लिए इन चरणों का ध्यान से पालन करें:
चरण 1: प्रातःकालीन तैयारी और संकल्प
- ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें, स्नान करें और घर की, विशेषकर पूजा स्थान की, सफ़ाई करें।
- स्वच्छ वस्त्र पहनें और दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें: "हे माँ काली, आज हम पूर्ण श्रद्धा से आपकी पूजा करते हैं। हमारे जीवन से भय और बुराई को दूर करें और हमारे परिवार को शक्ति और सुरक्षा का आशीर्वाद दें।"
- दिनभर हल्का उपवास रखें और पूजा पूरी होने तक केवल फल या सादा भोजन लें (जैसी आपके परिवार की परंपरा हो)।
चरण 2: दीपक जलाना (संध्या)
- सूर्यास्त के बाद द्वार, खिड़कियों और घर के चारों ओर दीपक जलाएँ।
- पूजा स्थान को स्वच्छ करें और स्वच्छ वस्त्र बिछी चौकी पर माँ काली की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- आम के पत्तों और नारियल के साथ कलश स्थापित करें और नैवेद्य आदि पास में रखें।
चरण 3: मध्यरात्रि की पूजा (निशीथ काल)
- दीपक जलाना: माँ काली के सामने दीपक और धूप जलाएँ।
- तिलक लगाना: माँ को सिंदूर, रोली और अक्षत अर्पित करें।
- फूल चढ़ाना: उनके चरणों में लाल गुड़हल के फूल, मालाएँ और बेलपत्र चढ़ाएँ।
- नैवेद्य अर्पित करना: फल, मिठाई और अपने परिवार की परंपरा का भोग प्रार्थना के साथ माँ के सामने रखें।
चरण 4: मंत्र जप और कथा
- वेदी के सामने श्रद्धा से बैठें और दाहिने हाथ में कुछ फूलों की पंखुड़ियाँ रखें।
- पूरे ध्यान से काली मंत्र या माँ के नाम का जप करें, अथवा माँ काली और रक्तबीज की कथा पढ़ें या सुनें।
- जप पूरा होने पर पंखुड़ियाँ माँ के चरणों में अर्पित करें।
चरण 5: आरती और पुष्पांजलि
- घी के दीपक और कपूर से काली आरती करें और भक्ति भरे भजन गाएँ।
- तीन बार पुष्पांजलि (प्रार्थना के साथ अर्पित मुट्ठी भर फूल) अर्पित करें और अपने परिवार की रक्षा तथा शांति की कामना करें।
- कुछ क्षण मौन रहें और माँ को प्रणाम करें।
चरण 6: आशीर्वाद लेना और प्रसाद बाँटना
- परिवार के बड़ों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें।
- प्रसाद परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों में बाँटें।
- कृतज्ञता के साथ पूजा संपन्न करें और प्रसाद तथा सादे सात्त्विक भोजन से उपवास खोलें।
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