लट्ठमार होली (बरसाना) 2027

बुधवार, 17 मार्च 2027

पूजा विधि


यह पर्व कौन मनाता है?

  • राधा-कृष्ण के भक्त: श्री राधा और भगवान कृष्ण के भक्त गहरे प्रेम और उल्लास के साथ इस उत्सव और राधा रानी की पूजा में शामिल होते हैं (प्रेम भक्ति)।
  • बरसाना की महिलाएँ: बरसाना की महिलाएँ पारंपरिक लाठी के खेल में भाग लेती हैं, जैसे कभी गोपियाँ कृष्ण और उनके सखाओं के साथ होली खेलती थीं।
  • परिवार: परिवार इसे रंगों, गीतों और मेल-मिलाप के आनंदमय पर्व के रूप में मनाते हैं।

पूजा का समय

  • प्रातः पूजा: सुबह जल्दी, ब्रह्म मुहूर्त में या उसके कुछ समय बाद स्नान करें और श्री राधा तथा भगवान कृष्ण की प्रार्थना करें।
  • मंदिर दर्शन: बरसाना में श्री राधा रानी (लाड़ली जी) के मंदिर के दर्शन करें, या उत्सव से पहले घर पर पूजा करें। अपने शहर के दर्शन का समय इसी पृष्ठ पर देखें।
  • लट्ठमार उत्सव: यह अपराह्न में होता है, जब नंदगाँव के पुरुष बरसाना आते हैं और महिलाएँ लाठियों से होली खेलती हैं।

पर्व के बारे में

लट्ठमार होली उत्तर प्रदेश के ब्रज क्षेत्र में बरसाना की प्रसिद्ध होली है, जिसमें महिलाएँ आए हुए पुरुषों पर हँसी-ठिठोली में लाठियाँ बरसाती हैं और पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं। यह पर्व फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाता है।


कथा (कृष्ण और बरसाना की गोपियों की कथा)

बहुत समय पहले नंदगाँव में नंद और यशोदा के पुत्र बाल कृष्ण रहते थे। उनकी प्रिय राधा पास के गाँव बरसाना में रहती थीं, और कृष्ण राधा तथा उनकी सखियों के साथ अपनी शरारतों के लिए जाने जाते थे।

होली के दिनों में कृष्ण अपने ग्वाल-बाल सखाओं के साथ नंदगाँव से बरसाना जाते थे, राधा और गोपियों के साथ होली खेलने। वे गीतों और रंगों से गोपियों को छेड़ते और गाँव में खूब मस्ती करते।

गोपियाँ भी पीछे रहने वाली नहीं थीं। उन्होंने हँसते-हँसते लाठियों से उन्हें खदेड़ दिया। हँसी-ठिठोली में उन्होंने आने वालों को जता दिया कि जो भी उनके गाँव में होली खेलने आएगा, उसे उनकी लाठियों के लिए तैयार रहना होगा। पुरुष दौड़कर अपनी ढालों के पीछे छिप गए और गीतों तथा हँसी के बीच खेल चलता रहा।

यह उत्सव सबको इतना भाया कि हर वर्ष की परंपरा बन गया। तभी से हर साल नंदगाँव के पुरुष लट्ठमार होली खेलने बरसाना आते हैं, और महिलाएँ रंगों और लाठियों से उनका स्वागत करती हैं।


पूजा सामग्री

पूजा और उत्सव शुरू करने से पहले ये सामग्री एकत्र कर लें:

  • चित्र / प्रतिमा: श्री राधा और भगवान कृष्ण का चित्र या प्रतिमा
  • रंग: गुलाल, अबीर और फूलों के प्राकृतिक रंग
  • दीपक और रोशनी: पीतल या मिट्टी का दीपक, घी और रुई की बाती, तथा अगरबत्ती
  • नैवेद्य: लड्डू, गुझिया, मालपुआ और ठंडाई
  • पूजा की अन्य वस्तुएँ: फूल, तुलसी दल और कलावा
  • उत्सव की सामग्री: पारंपरिक खेल के लिए लाठी और ढाल, तथा ढोलक और मंजीरा जैसे वाद्य

पूजा विधि (चरण-दर-चरण)

विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के लिए इन चरणों का ध्यान से पालन करें:

चरण 1: प्रातः तैयारी और संकल्प

  1. जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ, चटख रंग के वस्त्र पहनें (हो सके तो सफ़ेद, पीले या गुलाबी)।
  2. दाएँ हाथ की हथेली में थोड़ा जल लेकर संकल्प करें: "हे श्री राधा रानी और भगवान कृष्ण, आज हम श्रद्धा से होली मना रहे हैं। हमारे परिवार को आनंद, प्रेम और एकता का आशीर्वाद दीजिए।"
  3. दिन को पवित्र और आनंदमय रखें, मन में कोई द्वेष न रखें, और उत्सव से पहले केवल सादा सात्त्विक भोजन करें।

चरण 2: पूजा की चौकी सजाना

  1. ईशान कोण या अपने पूजा के स्थान को साफ़ करें।
  2. स्वच्छ कपड़े से ढकी लकड़ी की चौकी पर श्री राधा और भगवान कृष्ण का चित्र रखें।
  3. देवताओं के पास गुलाल और फूलों की एक छोटी थाली रखें।

चरण 3: पूजन विधि

  1. दीपक जलाना: श्री राधा और भगवान कृष्ण के सामने घी का दीपक और अगरबत्ती जलाएँ।
  2. रंग लगाना: पहले देवताओं को थोड़ा गुलाल अर्पित करें, फिर परिवार के लोगों को हल्का तिलक लगाएँ।
  3. फूल और पत्ते चढ़ाना: देवताओं को ताज़े फूल और तुलसी दल चढ़ाएँ।
  4. नैवेद्य अर्पित करना: देवताओं के सामने लड्डू, गुझिया और मालपुआ रखें।

चरण 4: दर्शन और लट्ठमार उत्सव

  1. यदि आप बरसाना में हैं, तो श्री राधा रानी (लाड़ली जी) के मंदिर में दर्शन करें और होली के पद (होरी और रसिया) सुनें।
  2. उत्सव देखें या उसमें शामिल हों, जिसमें नंदगाँव के पुरुष आते हैं और बरसाना की महिलाएँ लाठियों से होली खेलती हैं, जबकि पुरुष ढाल से अपना बचाव करते हैं।
  3. संगीत और नृत्य के साथ राधा-कृष्ण की पारंपरिक होली के गीत गाएँ।

चरण 5: आरती और प्रार्थना

  1. जलते हुए घी के दीपक से भक्ति-गीत गाते हुए राधा-कृष्ण की आरती करें।
  2. प्रसन्न मन से "राधे राधे" और "हरे कृष्ण" का जप करें।
  3. पर्व के आनंद के लिए धन्यवाद दें और परिवार में प्रेम तथा शांति की प्रार्थना करें।

चरण 6: आशीर्वाद लेना और प्रसाद बाँटना

  1. परिवार के बड़ों के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लें।
  2. प्रसाद और ठंडाई परिवार, मित्रों और पड़ोसियों में बाँटें।
  3. एक-दूसरे को रंग और उल्लास के साथ शुभकामनाएँ दें, और दिन का समापन सादे सात्त्विक भोजन से करें।

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