वैकुण्ठ चतुर्दशी 2026
सोमवार, 23 नवंबर 2026
पूजा विधि
यह व्रत कौन करे?
- विष्णु और शिव के भक्त: भगवान विष्णु और भगवान शिव, दोनों के उपासक यह व्रत करते हैं, क्योंकि यही एक दिन है जब दोनों की एक साथ पूजा की जाती है।
- मोक्ष की कामना करने वाले: जो भक्त जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) और भगवान विष्णु के धाम वैकुण्ठ के द्वार की प्रार्थना करते हैं।
पूजा का समय
- प्रातः स्नान: सुबह जल्दी, हो सके तो ब्रह्म मुहूर्त में, स्नान करें और व्रत आरंभ करें।
- भगवान विष्णु की पूजा: निशीथ काल (लगभग मध्यरात्रि) में की जाती है, क्योंकि यही इस दिन की मुख्य पूजा है। अपने शहर का पूजा मुहूर्त इसी पृष्ठ पर देखें।
- भगवान शिव की पूजा: भगवान विष्णु की पूजा के बाद, रात में ही की जाती है (कुछ परिवार अगली सुबह भोर में भगवान शिव की पूजा करते हैं)।
- व्रत खोलना: पूजा पूरी होने के बाद, या परिवार की परंपरा के अनुसार अगली सुबह।
पर्व के बारे में
वैकुण्ठ चतुर्दशी पूरे भारत में अत्यंत श्रद्धा से मनाया जाने वाला पर्व है, जिसमें भगवान विष्णु और भगवान शिव की एक साथ पूजा की जाती है। यह पर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है।
व्रत कथा (विष्णु और हज़ार कमलों की कथा)
एक समय की बात है, भगवान विष्णु इसी दिन भगवान शिव की पूजा करने काशी (वाराणसी) गए। मणिकर्णिका घाट पर गंगा में स्नान करने के बाद उन्होंने संकल्प लिया कि भगवान शिव के सहस्र नामों का जाप करते हुए वे उन्हें एक हज़ार स्वर्ण कमल अर्पित करेंगे।
भगवान विष्णु की भक्ति की परीक्षा लेने के लिए भगवान शिव ने उनमें से एक कमल छिपा लिया। जब विष्णु अंतिम नाम तक पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि एक कमल कम है और पूजा अधूरी रह जाने वाली है। बिना किसी हिचक के उन्हें याद आया कि उनके नेत्र कमल जैसे हैं और उन्हें कमलनयन कहा जाता है, और उन्होंने कमल के स्थान पर अपना नेत्र अर्पित करने का निश्चय किया।
इस पूर्ण भक्ति से द्रवित होकर भगवान शिव विष्णु के सामने प्रकट हुए और उन्हें रोक लिया। उन्होंने कहा: "तुम्हारी भक्ति के समान कोई नहीं। इस दिन जो भी हम दोनों की एक साथ पूजा करेगा, वह सब पापों से मुक्त होगा और उसके लिए वैकुण्ठ के द्वार खुल जाएँगे।" भगवान शिव ने इसी दिन भगवान विष्णु को सुदर्शन चक्र भी प्रदान किया।
तभी से कार्तिक शुक्ल चतुर्दशी को वैकुण्ठ चतुर्दशी मनाई जाती है, और भक्त पापों की क्षमा तथा वैकुण्ठ का मार्ग पाने के लिए विष्णु और शिव की एक साथ पूजा करते हैं।
पूजा सामग्री
रात की पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एकत्र कर लें:
- चित्र / मूर्ति: भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति, और शिवलिंग या भगवान शिव का चित्र
- तिलक और पूजन सामग्री: चंदन, रोली, कुमकुम और अक्षत
- दीपक और रोशनी: पीतल या मिट्टी का घी का दीपक, रुई की बत्ती, और धूप
- विष्णु के लिए पूजन सामग्री: तुलसी दल, पीले फूल और कमल के फूल
- शिव के लिए पूजन सामग्री: बेल पत्र, सफेद फूल, गंगाजल और कच्चा दूध
- भोग (नैवेद्य): फल, मिठाई, पंचामृत और खीर
पूजा विधि (चरण-दर-चरण)
विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के लिए इन चरणों का ध्यान से पालन करें:
चरण 1: प्रातः तैयारी और संकल्प
- ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें, स्नान करें (हो सके तो पानी में गंगाजल की कुछ बूँदें डालकर) और स्वच्छ, शुभ वस्त्र पहनें।
- दाहिनी हथेली में थोड़ा जल लेकर संकल्प करें: "हे भगवान विष्णु और भगवान शिव, आज हम शुद्ध श्रद्धा से यह व्रत करते हैं। हमारे पापों को क्षमा करें और हमें वैकुण्ठ का मार्ग प्रदान करें।"
- दिन भर उपवास रखें, ज़रूरत हो तो केवल फल और जल लें (कुछ परिवार निर्जल उपवास रखते हैं)।
चरण 2: पूजा की चौकी की तैयारी (संध्या)
- पूजा स्थान को साफ़ करें और लकड़ी की चौकी पर स्वच्छ कपड़ा बिछाएँ।
- भगवान विष्णु की प्रतिमा और शिवलिंग या भगवान शिव का चित्र साथ-साथ रखें।
- उनके पास स्वच्छ जल से भरा कलश रखें, और तुलसी दल तथा बेल पत्र अलग-अलग थालियों में तैयार रखें।
चरण 3: भगवान विष्णु की पूजा (निशीथ काल)
- दीपक जलाना: देवताओं के सामने घी का दीपक और धूप जलाएँ।
- तिलक लगाना: भगवान विष्णु को चंदन, रोली, कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएँ।
- फूल और तुलसी अर्पण: कमल के फूल, पीले फूल और तुलसी दल चढ़ाएँ, और भगवान विष्णु के नामों का जाप करें।
- नैवेद्य अर्पण: देवता के सामने फल, मिठाई और खीर रखें।
चरण 4: भगवान शिव की पूजा
- ॐ नमः शिवाय का जाप करते हुए शिवलिंग पर गंगाजल और कच्चा दूध चढ़ाएँ।
- बेल पत्र और सफेद फूल अर्पित करें, और चंदन लगाएँ।
- दाहिने हाथ में थोड़े चावल के दाने और फूलों की पंखुड़ियाँ लें, और पूरी श्रद्धा से वैकुण्ठ चतुर्दशी कथा का पाठ करें या सुनें।
चरण 5: आरती और प्रार्थना
- जलते हुए घी के दीपक से पहले भगवान विष्णु की, फिर भगवान शिव की आरती करें और भक्ति भजन गाएँ।
- दोनों हथेलियों को लौ के ऊपर घुमाकर आँखों से लगाते हुए आरती लें।
- पापों की क्षमा, अपने पितरों की शांति और वैकुण्ठ प्राप्ति की कृपा के लिए प्रार्थना करें।
चरण 6: आशीर्वाद लेना और दिन का समापन
- परिवार के बड़ों के चरण स्पर्श करके उनका आशीर्वाद लें।
- प्रसाद परिवार के सदस्यों में बाँटें।
- पूजा के बाद (या परिवार की परंपरा के अनुसार अगली सुबह) प्रसाद और सादे सात्विक भोजन से व्रत खोलें।
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