करमा पूजा 2027

शनिवार, 11 सितंबर 2027

पूजा विधि


यह व्रत कौन करे?

  • अविवाहित कन्याएँ और स्त्रियाँ: युवतियाँ और बहनें अपने भाइयों के स्वास्थ्य, लंबी आयु और समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं (भाई की रक्षा)।
  • किसान परिवार और समुदाय: झारखंड के परिवार अच्छी फसल, वर्षा और पूरे घर की सुख-समृद्धि के लिए करम राजा से प्रार्थना करते हैं।

पूजा का समय

  • व्रत: सुबह से पूजा पूरी होने तक दिनभर रखा जाता है। बहुत-सी महिलाएँ तब तक अन्न ग्रहण नहीं करतीं।
  • करम डाली की तैयारी: करम की डाली जंगल से लाई जाती है और दोपहर में समुदाय द्वारा आँगन में रोपी जाती है।
  • मुख्य पूजा मुहूर्त: करमा पूजा शाम को प्रदोष काल (सूर्यास्त के बाद का समय) में की जाती है। अपने शहर का पूजा मुहूर्त इसी पृष्ठ पर देखें।
  • रात्रि उत्सव: गीत और नृत्य (झूमर) रातभर चलते हैं और अगली सुबह डाली को नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है (सही समय परिवारों में अलग-अलग होता है)।

पर्व के बारे में

करमा पूजा, जिसे करम पर्व भी कहते हैं, झारखंड और आसपास के आदिवासी समुदायों का एक अत्यंत प्रिय पर्व है। इसमें भाइयों की सुख-समृद्धि और अच्छी फसल के लिए करम वृक्ष की पूजा की जाती है। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है।


व्रत कथा (करमा पूजा की कथा)

करमा पूजा, जिसे करम पर्व भी कहते हैं, झारखंड और आसपास के क्षेत्रों के आदिवासी और किसान समुदायों, जैसे उरांव, मुंडा, संथाल और हो, का एक प्राचीन फसल उत्सव है। इसमें करम वृक्ष का सम्मान किया जाता है, जिसकी पूजा करम राजा या करम देवता के रूप में होती है। वे अच्छी फसल, वर्षा और परिवार की सुख-समृद्धि के दाता माने जाते हैं।

पर्व से कुछ दिन पहले कन्याएँ बाँस की टोकरी में जौ, गेहूँ, चना और अन्य बीज बोती हैं और उगे हुए अंकुरों (जावा) की बड़े प्रेम से देखभाल करती हैं। पर्व के दिन युवक श्रद्धापूर्वक करम वृक्ष की एक डाली काटते हैं, आनंदमय शोभायात्रा के साथ उसे घर लाते हैं और आँगन में रोपते हैं, जहाँ पूरा गाँव उसके चारों ओर एकत्र होता है।

समुदाय के बुज़ुर्ग, अक्सर गाँव के पाहन (पुजारी), करम भाइयों की कथा सुनाते हैं। यह एक लोककथा है जो अनेक रूपों में कही जाती है। इसकी सीख है कि जो परिवार करम वृक्ष का सम्मान करता है, वह फलता-फूलता है, और जब पवित्र डाली का अनादर होता है, तब विपत्ति आती है, जब तक परिवार पश्चाताप कर फिर से करम राजा की पूजा नहीं करता।

बहनें उपवास रखती हैं, करम डाली को जावा और खीरा अर्पित करती हैं और अपने भाइयों की लंबी आयु और सुख की प्रार्थना करती हैं। तभी से लोग हर वर्ष एकत्र होकर रातभर गाते-नाचते हैं, प्रकृति के प्रति आभार प्रकट करते हैं और करम राजा का आशीर्वाद माँगते हैं।


पूजा सामग्री

शाम की पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एकत्र कर लें:

  • करम डाली: करम वृक्ष की ताज़ी डाली, जिसे आँगन में साफ़ और लीपी हुई जगह पर रोपा जाता है
  • जावा (पवित्र अंकुर): बाँस की टोकरी में पहले से उगाए गए जौ, गेहूँ और चने के अंकुर (जावा)
  • तिलक और पूजन सामग्री: सिंदूर, रोली और अक्षत
  • दीपक और प्रकाश: तेल या घी का मिट्टी का दीपक और धूप (अगरबत्ती)
  • नैवेद्य: खीरा, फल, चावल के आटे के पकवान और प्रसाद के रूप में मिठाई
  • पूजा के अन्य सामान: फूल, कच्चा सूत का धागा (कलावा) और ताज़े जल का पात्र

पूजा विधि (चरण-दर-चरण)

विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के लिए इन चरणों का ध्यान से पालन करें:

चरण 1: प्रातःकालीन तैयारी और संकल्प

  1. ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  2. दाहिने हाथ में थोड़ा जल लेकर संकल्प करें: "हे करम राजा, आज मैं अपने भाइयों और परिवार की लंबी आयु और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हूँ। शुद्ध भक्ति से इस व्रत को पूरा करने का बल दें।"
  3. दिनभर व्रत रखें, आमतौर पर शाम को पूजा पूरी होने तक।

चरण 2: करम डाली तैयार करना (दोपहर)

  1. आँगन को गोबर और मिट्टी से लीपकर साफ़ करें (जहाँ यह संभव न हो, वहाँ अच्छी तरह स्वच्छ करें)।
  2. साफ़ की हुई जगह के बीच में करम डाली रोपें और उसके चारों ओर सादी अल्पना बनाएँ।
  3. जावा की टोकरी और जल का पात्र डाली के पास रखें।

चरण 3: संध्या पूजन

  1. दीपक जलाना: करम डाली के सामने दीपक और धूप जलाएँ।
  2. तिलक लगाना: डाली और जावा को सिंदूर और अक्षत अर्पित करें।
  3. फूल और धागा चढ़ाना: फूल चढ़ाएँ और करम डाली पर कच्चे सूत का धागा बाँधें।
  4. नैवेद्य अर्पित करना: खीरा, फल और मीठे पकवान डाली की जड़ के पास रखें।

चरण 4: व्रत कथा का पाठ

  1. दाहिने हाथ में कुछ चावल के दाने और फूलों की कुछ पंखुड़ियाँ लें।
  2. करम डाली के चारों ओर श्रद्धा से बैठें और पूरे ध्यान और भक्ति से करमा पूजा कथा पढ़ें या सुनें।
  3. कथा पूरी होने पर दाने डाली की जड़ के पास अर्पित करें।

चरण 5: डाली के चारों ओर करम गीत और नृत्य

  1. जलता हुआ दीपक डाली के पास रखें और समुदाय के साथ करम राजा से छोटी-सी प्रार्थना करें।
  2. करम गीत गाने और डाली के चारों ओर झूमर नृत्य करने में शामिल हों और अपने भाइयों की खुशहाली की कामना करें।
  3. करम राजा को अंतिम प्रणाम करें और फसल के लिए उनका आशीर्वाद माँगें।

चरण 6: आशीर्वाद लेना और व्रत खोलना

  1. परिवार के बड़ों के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें।
  2. प्रसाद और जावा परिवार के सदस्यों और मित्रों में बाँटें।
  3. प्रसाद और सादे सात्त्विक भोजन से व्रत खोलें। अगली सुबह करम डाली को आदर के साथ नदी या तालाब में विसर्जित किया जाता है।

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