अनंत चतुर्दशी 2027
मंगलवार, 14 सितंबर 2027
पूजा विधि
यह व्रत कौन करे?
- परिवार और गृहस्थ: स्त्री-पुरुष पूरे परिवार की रक्षा, समृद्धि और कल्याण के लिए यह व्रत रखते हैं।
- भगवान विष्णु के भक्त: भगवान विष्णु के अनंत रूप के भक्त कष्टों से मुक्ति और खोए हुए सौभाग्य की वापसी के लिए प्रार्थना करते हैं।
- भगवान गणेश के भक्त: महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात में इसी दिन गणेश उत्सव का समापन मूर्ति के विसर्जन (गणेश विसर्जन) के साथ होता है।
पूजा का समय
- प्रातःकालीन स्नान और संकल्प: सवेरे जल्दी, ब्रह्म मुहूर्त में या सूर्योदय के समय।
- पूजा मुहूर्त: अनंत चतुर्दशी की पूजा प्रातःकाल पूर्वाह्न में की जाती है। अपने शहर का पूजा मुहूर्त इसी पृष्ठ पर देखें।
- अनंत सूत्र बाँधना: पूजा के अंत में, सूत्र का पूजन करने के बाद किया जाता है।
- गणेश विसर्जन: जहाँ गणेश उत्सव मनाया जाता है, वहाँ विसर्जन दिन में बाद में होता है। अपने शहर का समय इसी पृष्ठ पर देखें।
पर्व के बारे में
अनंत चतुर्दशी व्यापक रूप से मनाया जाने वाला पर्व है, जिसमें श्रद्धालु भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा करते हैं और अनंत सूत्र नामक पवित्र रक्षा-सूत्र बाँधते हैं। यह पर्व भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है।
व्रत कथा (शीला और कौंडिन्य की कथा)
बहुत समय पहले सुमंत नाम के एक विद्वान ब्राह्मण की शीला नाम की गुणवती पुत्री थी। माता के देहांत के बाद उसका विवाह ऋषि कौंडिन्य से हुआ। उनके घर जाते समय कौंडिन्य दोपहर के नित्यकर्म के लिए एक नदी के किनारे रुके, और शीला ने देखा कि स्त्रियों का एक समूह चतुर्दशी पर भगवान अनंत की पूजा कर रहा है।
स्त्रियों ने उसे व्रत का विधान बताया: "चौदह गाँठों वाला पवित्र सूत्र अपनी बाँह पर बाँधो, भगवान विष्णु की पूजा करो और भोग लगाओ, तो वे तुम्हारे सब दुख हर लेंगे और स्थायी सुख देंगे।" शीला ने व्रत का संकल्प लिया, अपनी बाँह पर अनंत सूत्र बाँधा, और शीघ्र ही उसका घर धन-धान्य से भर गया।
एक दिन कौंडिन्य ने वह सूत्र देखा, उसे कोई टोटका समझ बैठे और क्रोध में आकर उसे तोड़कर आग में फेंक दिया। उसी क्षण से उनका धन नष्ट हो गया और परिवार पर विपत्तियाँ आ गईं। अपनी भूल का एहसास होने पर वे भगवान अनंत की खोज में निकल पड़े और वनों तथा नदियों में भटकते रहे, जब तक कि प्रभु के दर्शन नहीं हुए। प्रभु ने उन्हें क्षमा किया और चौदह वर्ष तक व्रत रखने की सलाह दी।
कौंडिन्य और शीला ने निष्ठा से यह व्रत किया और उनकी समृद्धि तथा शांति लौट आई। तभी से श्रद्धालु भगवान विष्णु की रक्षा की कामना से अनंत चतुर्दशी पर अनंत सूत्र बाँधते आ रहे हैं।
पूजा सामग्री
सुबह की पूजा शुरू करने से पहले ये सामग्री एकत्र कर लें:
- चित्र / मूर्ति: चौकी पर भगवान विष्णु का चित्र या मूर्ति (या शेषनाग पर विश्राम करते भगवान अनंत का चित्र)
- अनंत सूत्र: कुमकुम या हल्दी से रंगा चौदह गाँठों वाला धागा, बाँधने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए एक
- तिलक और पूजन सामग्री: रोली, कुमकुम, हल्दी और अक्षत
- दीपक और धूप: घी और रुई की बाती सहित दीपक, तथा धूप या अगरबत्ती
- जल पात्र: ताज़े जल से भरा कलश, जिस पर आम के पत्ते और नारियल रखे हों
- नैवेद्य: पंचामृत, फल, मिठाई, और पूरी या पुआ, जो परिवार प्रायः चौदह-चौदह की संख्या में चढ़ाते हैं
पूजा विधि (चरण-दर-चरण)
विधि-विधान से पूजा संपन्न करने के लिए इन चरणों का ध्यान से पालन करें:
चरण 1: प्रातःकालीन तैयारी और संकल्प
- ब्रह्म मुहूर्त में जल्दी उठें, स्नान करें और स्वच्छ, शुभ वस्त्र पहनें।
- दाएँ हाथ की हथेली में थोड़ा जल लेकर संकल्प करें: "हे भगवान अनंत, आज हम आपका व्रत रख रहे हैं और आपका पवित्र सूत्र बाँध रहे हैं। हमारी और हमारे परिवार की दुखों से रक्षा करें, और हमें स्थायी सुख तथा समृद्धि दें।"
- बहुत से श्रद्धालु पूजा पूरी होने तक उपवास रखते हैं या केवल सात्विक भोजन करते हैं।
चरण 2: पूजा स्थान की तैयारी
- अपने घर का ईशान कोण (उत्तर-पूर्व कोना) या पूजा घर साफ़ करें।
- भगवान विष्णु का चित्र स्वच्छ पीले या लाल कपड़े से ढकी चौकी पर रखें।
- जल से भरा कलश चित्र के पास रखें और अनंत सूत्र को उसके बगल में या कलश के ऊपर रखें।
चरण 3: पूजन
- दीपक जलाना: भगवान विष्णु के सामने घी का दीपक और धूप जलाएँ।
- तिलक लगाना: चित्र और अनंत सूत्र पर रोली, कुमकुम, हल्दी और अक्षत लगाएँ।
- फूल और तुलसी अर्पित करना: प्रभु को ताज़े फूल और तुलसी दल चढ़ाएँ।
- नैवेद्य अर्पित करना: देवता के सामने पंचामृत, फल और मिठाई रखें।
चरण 4: व्रत कथा का पाठ
- दाएँ हाथ में चावल के कुछ दाने और फूलों की पंखुड़ियाँ लें।
- वेदी के सामने श्रद्धापूर्वक बैठें और पूरे ध्यान और भक्ति के साथ अनंत चतुर्दशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- कथा के बाद दाने और पंखुड़ियाँ भगवान विष्णु के चरणों में अर्पित करें।
चरण 5: अनंत सूत्र बाँधना और आरती
- अनंत सूत्र का पूजन करें और उसे हाथों में लेकर भगवान अनंत के नाम का जप करें।
- परिवार की रक्षा की प्रार्थना करते हुए उसे पुरुष दाईं बाँह पर और स्त्रियाँ बाईं बाँह पर बाँधें (अनंत सूत्र बंधन)।
- जलते हुए घी के दीपक से भगवान विष्णु की आरती करें। जहाँ गणेश उत्सव मनाया जाता है, वहाँ गणेश जी की विदाई आरती की जाती है और दिन में बाद में मूर्ति का विसर्जन (गणेश विसर्जन) होता है।
चरण 6: आशीर्वाद लेना और दिन का समापन
- परिवार के बड़ों के चरण छूकर (चरण स्पर्श) उनका आशीर्वाद लें।
- प्रसाद परिवार के सदस्यों और पड़ोसियों में बाँटें, और सामर्थ्य के अनुसार ज़रूरतमंदों को दान दें।
- पूजा के बाद सादा सात्विक भोजन करें, और पारिवारिक रीति के अनुसार व्रत की अवधि तक सूत्र को बाँह पर बाँधे रखें।
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