पंचांग — मॉन्ट्रियल
सभी समय मॉन्ट्रियल के स्थानीय समय में हैं।
एक नज़र में
वर्तमान पंचांग
- तिथि
- त्रयोदशी
- 12:18 AM, 7 नव॰ तक, फिर चतुर्दशी
- नक्षत्र
- हस्त
- 6:13 PM तक, फिर चित्रा
- वार
- शुक्रवार
- 6:42 AM, 7 नव॰ तक
- योग
- विष्कुंभ
- 5:40 PM तक, फिर प्रीति
- करण
- गर
- 12:07 PM तक, फिर वणिज
आज किन कामों के लिए शुभ है
- गृह प्रवेश
- भूमि खरीद
- खरीदारी
- बिक्री
- नए वस्त्र पहनना
- गोद भराई
- गर्भाधान
- जातकर्म
- नामकरण
- अन्नप्राशन
- कान छेदन
- नई नौकरी शुरू करना
- पदभार ग्रहण
- दुकान खोलना
- शिल्प सीखना
- मुकदमा दायर करना
- कर्ज़ वसूली
- यात्रा
- ग्रह शांति
- मूर्ति स्थापना
- इलाज शुरू करना
- पशु खरीद
- बुवाई
- कटाई
- पशुशाला प्रवेश
शुभटालेंस्रोतों में मतभेद
आज के व्रत और त्योहार
शुभ और अशुभ समय
शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त4:49 AM – 5:45 AM, 7 नव॰सूर्योदय से पहले का शुभ समय
- अभिजीत मुहूर्त11:17 AM – 11:57 AMमध्याह्न का शुभ समय
- विजय मुहूर्त1:16 PM – 1:56 PMहोरा पर आधारित शुभ समय
- गोधूलि मुहूर्त4:14 PM – 5:02 PMसंध्या का गोधूलि समय
अशुभ समय
- राहु काल10:23 AM – 11:37 AMनए कार्य के आरंभ के लिए अशुभ
- गुलिक काल7:55 AM – 9:09 AMनए कार्य के लिए अशुभ, आध्यात्मिक साधना के लिए शुभ
- यमगंड काल2:05 PM – 3:20 PMअत्यंत अशुभ समय
- दुर्मुहूर्त8:39 AM – 9:19 AM11:57 AM – 12:36 PMअशुभ समय
सूर्य और चंद्रमा का समय
हिंदू मास
पंचांग
तिथि
नक्षत्र
योग
वार
करण
चौघड़िया
दिन और रात, दोनों आठ-आठ चौघड़ियों में बँटे होते हैं। अमृत, शुभ और लाभ नए काम के लिए अच्छे हैं, चर यात्रा के लिए ठीक है, और रोग, काल और उद्वेग से बचना चाहिए।
दिन का चौघड़िया (सूर्योदय से सूर्यास्त)
| चौघड़िया | समय | फल |
|---|---|---|
| चर | 6:40 AM – 7:55 AM | सामान्य |
| काल | 7:55 AM – 9:09 AM | अशुभ |
| उद्वेग | 9:09 AM – 10:23 AM | अशुभ |
| अमृत | 10:23 AM – 11:37 AM | शुभ |
| रोग | 11:37 AM – 12:51 PM | अशुभ |
| लाभ | 12:51 PM – 2:05 PM | शुभ |
| शुभ | 2:05 PM – 3:20 PM | शुभ |
| चर | 3:20 PM – 4:34 PM | सामान्य |
रात का चौघड़िया (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक)
| चौघड़िया | समय | फल |
|---|---|---|
| रोग | 4:34 PM – 6:20 PM | अशुभ |
| लाभ | 6:20 PM – 8:06 PM | शुभ |
| शुभ | 8:06 PM – 9:52 PM | शुभ |
| चर | 9:52 PM – 11:38 PM | सामान्य |
| काल | 11:38 PM – 1:24 AM | अशुभ |
| उद्वेग | 1:24 AM – 3:10 AM | अशुभ |
| अमृत | 3:10 AM – 4:56 AM | शुभ |
| रोग | 4:56 AM – 6:42 AM | अशुभ |
पंचांग शुभ है। क्या यह आपके लिए भाग्यशाली है?
शुभ मुहूर्त तिथियां 2026 और 2027
विवाह, गृह प्रवेश या कोई संस्कार करना है? साल का हर शुभ दिन देखें, महीने के हिसाब से।
- गृह प्रवेशगृह प्रवेश मुहूर्त 2026गृह प्रवेश मुहूर्त 2027
- विवाहविवाह मुहूर्त 2026विवाह मुहूर्त 2027
- वाहन खरीदवाहन खरीद मुहूर्त 2026वाहन खरीद मुहूर्त 2027
- संपत्ति खरीदसंपत्ति खरीद मुहूर्त 2026संपत्ति खरीद मुहूर्त 2027
- भूमि पूजनभूमि पूजन मुहूर्त 2026भूमि पूजन मुहूर्त 2027
- दुकान उद्घाटनदुकान उद्घाटन मुहूर्त 2026दुकान उद्घाटन मुहूर्त 2027
- नौकरी ज्वाइनिंगनौकरी ज्वाइनिंग मुहूर्त 2026नौकरी ज्वाइनिंग मुहूर्त 2027
- नामकरणनामकरण मुहूर्त 2026नामकरण मुहूर्त 2027
- मुंडनमुंडन मुहूर्त 2026मुंडन मुहूर्त 2027
- अन्नप्राशनअन्नप्राशन मुहूर्त 2026अन्नप्राशन मुहूर्त 2027
- जनेऊजनेऊ मुहूर्त 2026जनेऊ मुहूर्त 2027
- कर्णवेधकर्णवेध मुहूर्त 2026कर्णवेध मुहूर्त 2027
- हवनहवन मुहूर्त 2026हवन मुहूर्त 2027
- मूर्ति स्थापनामूर्ति स्थापना मुहूर्त 2026मूर्ति स्थापना मुहूर्त 2027
आने वाले व्रत और त्योहार
सभी त्योहार देखें- दीपावली11 नवंबर 2026 तक
- काली पूजारविवार
- केदार गौरी व्रतरविवार
- सोमवती अमावस्यासोमवार
- चित्रगुप्त पूजाबुधवार
- छठ पूजा16 नवंबर 2026 तक
- नागुल चवितिशुक्रवार
- लाभ पंचमीशनिवार
- सूरसंहारम्रविवार
- जलाराम जयंतीसोमवार
- गोपाष्टमीमंगलवार
- अक्षय नवमीबुधवार
- दीपावली: 6 नवंबर 2026 – 11 नवंबर 2026
- काली पूजा: 8 नवंबर 2026
- केदार गौरी व्रत: 8 नवंबर 2026
- सोमवती अमावस्या: 9 नवंबर 2026
- चित्रगुप्त पूजा: 11 नवंबर 2026
- छठ पूजा: 13 नवंबर 2026 – 16 नवंबर 2026
- नागुल चविति: 13 नवंबर 2026
- लाभ पंचमी: 14 नवंबर 2026
- सूरसंहारम्: 15 नवंबर 2026
- जलाराम जयंती: 16 नवंबर 2026
- गोपाष्टमी: 17 नवंबर 2026
- अक्षय नवमी: 18 नवंबर 2026
मॉन्ट्रियल के पंचांग के बारे में
मॉन्ट्रियल भारत से 10 घंटे 30 मिनट पीछे है (गर्मियों में 9 घंटे 30 मिनट)। तिथि स्थानीय सूर्योदय से गिनी जाती है, इसलिए यहाँ कोई व्रत या त्योहार भारत से अलग तारीख़ को पड़ सकता है। यह पेज मॉन्ट्रियल के अपने सूर्योदय का उपयोग करता है, इसलिए यहाँ दिखाई गई तारीख़ मॉन्ट्रियल के लिए सही है।
ये समय मध्य मॉन्ट्रियल (45.50° उ, 73.57° प) के लिए निकाले गए हैं। पूर्व या पश्चिम में हर 20 किमी पर ये लगभग एक मिनट बदल जाते हैं, इसलिए अगर आप शहर से दूर रहते हैं, तो ऊपर अपना शहर खोजें।
दूसरे शहरों का पंचांग
- टोरंटो
- न्यूयॉर्क
- सैन फ़्रांसिस्को
- वैंकूवर
- शिकागो
- वॉशिंगटन डीसी
- डलास
- लॉस एंजेलिस
- ह्यूस्टन
- फ़िलाडेल्फ़िया
- अटलांटा
- बॉस्टन
- सिएटल
- डेट्रॉइट
- कैलगरी
- एडमंटन
- सैक्रामेंटो
- मियामी
- ऑस्टिन
- फ़ीनिक्स
- रैले
- ऑरलैंडो
- सैन डिएगो
- विनिपेग
- ओटावा
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए? क्या राहु काल में पूजा कर सकते हैं?
राहु काल हर दिन लगभग डेढ़ घंटे का समय है, जिसमें परंपरा से कोई नई शुरुआत नहीं की जाती: यात्रा पर निकलना, खरीदारी, नई नौकरी या व्यापार, कोई संस्कार। पहले से चल रहा काम और रोज़ की पूजा सामान्य रूप से चलती है।
ब्रह्म मुहूर्त क्या है?
ब्रह्म मुहूर्त रात के अंतिम भाग में, सूर्योदय से पहले का लगभग 48 मिनट का समय है, जिसे ध्यान, प्रार्थना और पढ़ाई के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है: अमृत, शुभ या लाभ?
तीनों ही नया काम शुरू करने के लिए अच्छे हैं। अमृत हर काम के लिए अच्छा माना जाता है, शुभ संस्कार और पूजा के लिए, और लाभ व्यापार, खरीदारी और पढ़ाई के लिए। चर यात्रा के लिए ठीक है; रोग, काल और उद्वेग से बचना बेहतर है।
तिथि कितनी लंबी होती है और कब बदलती है?
तिथि एक चंद्र दिन है: चंद्रमा को सूर्य से 12° और आगे जाने में लगने वाला समय, इसलिए यह किसी भी समय शुरू और खत्म हो सकती है। दिन का नाम सूर्योदय के समय की तिथि से होता है, और पंचांग दिन एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक चलता है।
पंचांग के पांच अंग कौन-से हैं?
तिथि (चंद्र दिन), नक्षत्र (जिस तारे में चंद्रमा है), योग (सूर्य और चंद्रमा की संयुक्त स्थिति का माप), करण (आधी तिथि) और वार (सप्ताह का दिन)।
अमांत और पूर्णिमांत महीनों में क्या अंतर है?
अमांत महीने अमावस्या पर खत्म होते हैं और ज़्यादातर दक्षिण और पश्चिम भारत में माने जाते हैं; पूर्णिमांत महीने पूर्णिमा पर खत्म होते हैं और ज़्यादातर उत्तर भारत में माने जाते हैं। कृष्ण पक्ष में पूर्णिमांत महीने का नाम एक महीना आगे चलता है।
अमेरिका, ब्रिटेन या किसी दूसरे शहर में तिथि अलग क्यों होती है?
तिथि हर जगह एक ही क्षण बदलती है, लेकिन हर जगह की घड़ी में वह क्षण अलग समय होता है, और हर जगह का सूर्योदय अलग होता है। इसलिए विदेश में तिथि किसी दूसरी तारीख को शुरू हो सकती है, और कोई व्रत या त्योहार भारत से एक दिन आगे-पीछे पड़ सकता है।